मेघालय हनीमून मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा था कि मुकदमे के इस चरण में उसे जमानत नहीं दी जा सकती। मामला मई 2025 में इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हुई हत्या से जुड़ा है।
Meghalaya honeymoon murder case: देशभर में चर्चा में रहे मेघालय हनीमून मर्डर केस में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पति राजा रघुवंशी की हत्या की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने मंगलवार को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने के आदेश के बाद सोनम ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने पिछले सप्ताह मेघालय सरकार की अपील स्वीकार करते हुए सोनम की जमानत रद्द कर दी थी। अदालत ने कहा था कि मुकदमे के इस चरण में उसे जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सोनम को गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी। यदि गिरफ्तारी मेमो में कोई टाइपिंग संबंधी गलती भी थी, तो केवल उसी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने माना कि मुकदमा महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है और इस समय आरोपी का जमानत पर बाहर रहना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता है तो सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है। सोनम के सरेंडर के बाद राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने न्यायपालिका, मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि मामले की सुनवाई जल्द पूरी होगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
मई 2025 में इंदौर निवासी कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे। कुछ दिनों बाद दोनों लापता हो गए। बाद में राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ।
जांच एजेंसियों के अनुसार, 25 वर्षीय सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा के साथ मिलकर आर्थिक लाभ के लिए राजा की हत्या की साजिश रची और हमलावरों को इसके लिए तैयार किया। जून 2025 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। पहले शिलांग की ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट ने उसे जमानत दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आदेशों को रद्द करते हुए जमानत निरस्त कर दी।


