यूपी में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे मेल मुलाकातों का दौर भी तेज हो रहा है। ऐसी ही एक मुलाकात चर्चा में आ गई है। सीएम योगी अचानक देवरिया के पूर्व सांसद श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की है।
UP Politics: यूपी में विधानसभा चुनाव अगर समय पर भी हुए तो तैयारी के लिए अब सिर्फ छह से सात महीने ही बचे हैं। ऐसे में राजनीतिक हलचल और मेल-मुलाकातों का दौर तेज हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ऐसी ही एक मुलाकात की चर्चा राजनीतिक हलके से लेकर सोशल मीडिया पर छाई हुई है। हम बात कर रहे हैं देवरिया के पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी और सीएम योगी की मुलाकात की। सीएम योगी ने शुक्रवार को देवरिया में सभा की थी और वहां से गोरखपुर पहुंचने पर श्रीप्रकाश मणि के आवास पर अचानक उनसे मिलने पहुंच गए थे।
पूर्व सांसद से उनके घर पर मुख्यमंत्री की मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं तो सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक छा गईं। लोग इस मुलाकात के निहितार्थ निकालने लगे। फिलहाल राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ इसके पीछे ब्राह्मण समाज को अहमियत का संदेश मान रहे हैं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर बड़ा ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रही है। पिछले दिनों लखनऊ में अखिलेश यादव की उपस्थिति में इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया था।
श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के परिवार का पूर्वांचल में खास स्थान
श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के परिवार की प्रतिष्ठा कई पीढ़ियों से न सिर्फ देवरिया के ब्राह्मण समाज में है, बल्कि पूरे पूर्वांचल में है। लेफ्टिनेंट जनरल रहे श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद देवरिया से 1996 और 1999 में भाजपा के सांसद रहे। उन्हें देवरिया से भाजपा का पहला सांसद होने का गौरव मिला था।
इस परिवार के प्रभाव को देखते हुए भाजपा ने 2024 के चुनाव में देवरिया सदर लोकसभा सीट से सीटिंग एमपी डॉ. रमापति राम त्रिपाठी का टिकट काटते हुए शशांक मणि त्रिपाठी पर दांव लगाया। भाजपा भले ही पूर्वांचल समेत यूपी में सपा से पिछड़ गई लेकिन शशांक मणि ने देवरिया सीट जीत कर पार्टी के विश्वास को कायम रखा। अब 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की चुनौती भाजपा के सामने है।
34 दिन में सीएम का दो दौरा, अरबों की सौगात
पिछले 34 दिनों के अंदर सीएम योगी का दो बार देवरिया आगमन हो चुका है। अपने दोनों दौरे में जहां उन्होंने जिले को 1000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दी, वहीं अपनी जनसभाओं में वे विपक्ष पर जमकर हमलावर रहे।
मुख्यमंत्री के देवरिया जिले में हुए दोनों कार्यक्रमों को भी विस चुनाव की रणनीति से जोड़ कर देखा जा रहा है। 22 मई के दौरे में मुख्यमंत्री ने देवरिया सदर, रामपुर कारखाना और पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र को 655.45 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी, वहीं 26 जून के दौरे में बरहज और रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र को 456 करोड़ का तोहफा दिया। यही नहीं इस दौरान उन्होंने देवरिया के लिए अपनी प्राथमिकताओं को गिनाते हुए यहां के लोगों से दिल का रिश्ता जोड़ा।
देवरिया में इतिहास दुहराने की है चुनौती
2027 में भाजपा के सामने देवरिया में अपना ही इतिहास दुहाराने की चुनौती है। पार्टी ने 2022 में जिले की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। 2017 में भी देवरिया ने 7 में से 6 सीटें भाजपा की झोली में डाल दी थी। तब एकमात्र भाटपाररानी की सीट उसके खाते में नहीं आई थी, लेकिन 2022 में यह कसक भी पूरी हो गई और भाजपा के सभाकुंवर ने समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जा रहे भाटपाररानी में पहली बार कमल खिला दिया।
2017 और 2022 में भाजपा को मिली भारी जीत में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका अहम रही है। ऐसे में सीएम योगी की मुलाकात को भी उसी नजरिए से देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से ब्राह्मण समाज और भाजपा को लेकर कई तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं। लखनऊ में भाजपा के ब्राह्मण समाज के विधायकों के बाटी चोखा सहभोज ने भी असहज किया था। यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भी नसीहत और नोटिस देनी पड़ी थी।



