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बहराइच की कृषि सखी लाल परी की अनोखी पहल, जीवामृत से बदल रही किसानों की तकदीर, जाने फॉर्मूला

admin by admin
September 16, 2026
in उत्तर प्रदेश
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बहराइच की कृषि सखी लाल परी की अनोखी पहल, जीवामृत से बदल रही किसानों की तकदीर, जाने फॉर्मूला

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Last Updated:September 16, 2026, 12:47 IST

बहराइच में लाल परी अपने क्षेत्र में कृषि सखी के पद पर कार्यरत हैं और लगातार किसानों को रासायनिक खादों व जहरीले कीटनाशकों के नुकसान के प्रति जागरूक कर रही हैं. वे किसानों को समझा रही हैं कि यूरिया और डीएपी जैसी महंगी रसायनों का इस्तेमाल बंद करके कैसे घर पर ही कम लागत में फसलों के लिए प्राकृतिक खाद तैयार किए जा सकते हैं. उनका मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना और फसलों को घातक बीमारियों से बचाना है.

ख़बरें फटाफट

​बहराइच: जिले से प्राकृतिक और जैविक खेती की एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने निकल कर आ रही है, बदलते दौर में जहां कृषि क्षेत्र में लागत और तरह-तरह की कठिनाइयाँ बढ़ रही हैं, वहीं गांव की महिलाओं ने अब खुद आगे आकर खेती-किसानी की कमान संभाल ली है. जिले के तेजवापुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मिर्जापुर की रहने वाली लाल परी आज अपने पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और जहरमुक्त खेती की एक अनूठी मिसाल बनकर उभर रही हैं.

​रासायनिक खादों के खिलाफ जैविक क्रांति

लाल परी अपने क्षेत्र में कृषि सखी के पद पर कार्यरत हैं और लगातार किसानों को रासायनिक खादों व जहरीले कीटनाशकों के नुकसान के प्रति जागरूक कर रही हैं. वे किसानों को समझा रही हैं कि यूरिया और डीएपी जैसी महंगी रसायनों का इस्तेमाल बंद करके कैसे घर पर ही कम लागत में फसलों के लिए प्राकृतिक खाद तैयार किए जा सकते हैं. उनका मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना और फसलों को घातक बीमारियों से बचाना है. प्राकृतिक खेती के फायदों को बताते हुए लाल परी बताती हैं कि जब किसान खेतों से रासायनिक खाद हटाते हैं, तो उनकी जगह जीवामृत और घन जीवामृत समेत कई प्राकृतिक पोषक तत्वों का प्रयोग कर सकते हैं. यह जैविक मिश्रण यूरिया और डीएपी दोनों की कमी को पूरा करता है.

​ऐसे बनता है 200 लीटर का जीवामृत

जीवामृत तैयार करने के लिए 200 लीटर क्षमता वाले एक ड्रम में 175 लीटर पानी लिया जाता है. इसके बाद इसमें 10 किलोग्राम देशी गाय का गोबर, 10 लीटर गौमूत्र, 2 किलोग्राम गुड़, 2 किलोग्राम बेसन और 1 किलोग्राम सजीव मिट्टी जो बरगद के पेड़ के नीचे की हो या खेत की मेढ़ से ऊपर की सतह हटाकर निकाली गई हो, मिलाई जाती है.
​फसलों के लिए वरदान हैं गुड बैक्टीरिया तैयार जीवामृत में असंख्य ‘गुड बैक्टीरिया लाभकारी सूक्ष्मजीव पनपते हैं, जो मिट्टी में जाकर उसकी उर्वरता को कई गुना बढ़ा देते हैं. यह घोल फसलों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

​इस्तेमाल करने का बेहद आसान तरीका

कृषि सखी के अनुसार, इसे खेतों में डालना बेहद आसान है, ​घन जीवामृत खेत की जुताई से पहले इसे डालकर जुताई करवा दी जाती है और फिर रोपाई की जाती है. फसल लगने के बाद मटके या डिब्बे में छोटा सा सुराख करके सिंचाई के पानी के साथ टपका-टपका कर पूरे खेत में पहुंचाया जाता है. यदि कोई बर्तन उपलब्ध न हो, तो पानी की नाली या पाइप के पास लोटे से थोड़ा-थोड़ा करके इसे मिलाया जा सकता है, जिससे यह पूरे खेत में फैल जाता है. इसके अलावा स्प्रे मशीन से भी इसका छिड़काव किया जा सकता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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Location :

Bahraich,Uttar Pradesh

First Published :

September 16, 2026, 12:47 IST

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