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6 महीने से अटके राष्ट्रीय खेल पुरस्कार! आखिर क्यों हो रही देरी? खिलाड़ी उलझन में, मंत्रालय ने साधी चुप्पी

admin by admin
June 11, 2026
in खेल
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6 महीने से अटके राष्ट्रीय खेल पुरस्कार! आखिर क्यों हो रही देरी? खिलाड़ी उलझन में, मंत्रालय ने साधी चुप्पी

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नई दिल्ली: भारत के खेल जगत में इन दिनों थोड़ी बेचैनी है और इसकी मुख्य वजह है राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में हो रहा विलंब. भारत की खेल उपलब्धियों का सालाना जश्न, यानी राष्ट्रीय खेल पुरस्कार अभी तक घोषित नहीं किए गए हैं जबकि चयन समिति ने छह महीने पहले ही अपनी सिफारिशें सौंप दी थीं. खेल मंत्रालय ने इस स्थिति के लिए ‘अर्जुन पुरस्कार के लिए चुने गए नामों की दोबारा समीक्षा’ को वजह बताया है.

मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद ही चुने गए नामों को पुरस्कार विजेता का दर्जा मिलता है. मंत्रालय के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक यह लंबा इंतजार प्रक्रिया का हिस्सा है और ‘पुरस्कारों की गरिमा बनाए रखने’ के लिए जरूरी है. हालांकि यह सफाई खिलाड़ियों के लिए राहत की बात नहीं है. ओलंपिक पदक जीतने वाले एक पूर्व खेल रत्न पुरस्कार विजेता ने पीटीआई से बातचीत में अफसोस जताते हुए कहा:

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है. यह खिलाड़ियों का हौसला तोड़ने वाला है, विशेषकर इसलिए क्योंकि अनौपचारिक रूप से अधिकतर लोगों को पता चल जाता है कि छांटी गई सूची में उनका नाम है या नहीं.

भव्य राष्ट्रपति भवन में होने वाले इस समारोह की तारीख पिछले काफी समय से तय नहीं है. पारंपरिक रूप से यह समारोह 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर आयोजित किया जाता था जो भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन भी है. हालांकि 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद से इसकी तारीख तय नहीं रही है. तब स्वास्थ्य नियमों के कारण समारोह का वर्चुअल आयोजन किया गया था.

ओलंपिक और अन्य बहु खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए इसके आयोजन को कई बार 29 अगस्त के बाद कुछ महीनों के लिए आगे बढ़ाया गया है. पिछली बार यह समारोह पिछले साल 17 जनवरी को हुआ था. पिछले समारोह को एक साल से अधिक समय बीत चुका है और 2025-26 के सम्मान के लिए सिफारिशें दिसंबर 2025 में की गई थीं.

मौजूदा नियमों के अनुसार अंतिम रूप दिए जाने के एक हफ्ते के भीतर खेल मंत्रालय को इनकी औपचारिक घोषणा करनी थी और जरूरत पड़ने पर इनमें मामूली बदलाव किए जा सकते थे. हफ्ते बीतकर महीने हो गए हैं लेकिन घोषणा कब होगी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. ‘निराशा’ इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अगले सत्र के लिए नामांकन की प्रक्रिया का समय भी बहुत दूर नहीं है. पूर्व खेल रत्न विजेता ने कहा:

इन पुरस्कारों के लिए हमेशा एक तय कार्यक्रम का पालन किया जाना चाहिए. जो भी मूल्यांकन किया जाना है, वह किया जा सकता है लेकिन इस तरह नामों को रोककर नहीं. मुझे यकीन है कि चुने गए अधिकतर लोग इन सम्मान के हकदार हैं.

अर्जुन पुरस्कार पाने वाले एक पूर्व खिलाड़ी और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता भी इससे सहमत हैं. नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर उन्होंने कहा कि तारीख कभी नहीं बदली जानी चाहिए थी और अगर मकसद 29 अगस्त को सिर्फ मेजर ध्यानचंद की विरासत के तौर पर मनाना था तो पुरस्कार के लिए कोई नई तय तारीख रखनी चाहिए थी. उन्होंने कहा:

शुरू में अलग-अलग वजहों से तारीख बदलती रही और अब पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है, जिसमें खिलाड़ियों की कोई गलती नहीं है. मंत्रालय को कम से कम कुछ तो स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि ये सम्मान खिलाड़ियों के लिए किसी सालाना महोत्सव की तरह होते हैं. ब्लेजर की फिटिंग, पूरे प्रोटोकॉल की ड्रेस रिहर्सल और आखिर में राष्ट्रपति के साथ वो पल- ये सब खिलाड़ियों के लिए बहुत खास होता है. इन पुरस्कारों के साथ भावनाएं जुड़ी होती हैं और यह बिल्कुल ठीक नहीं है कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है कि किस तरह की समीक्षा हो रही है. थोड़ी पारदर्शिता तो होनी ही चाहिए. अगर आप 29 अगस्त को समारोह नहीं करना चाहते तो ठीक है लेकिन कोई ऐसी तारीख तय करें जो आगे चलकर परंपरा बन जाए.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ पूर्व पुरस्कार विजेता इस देरी से परेशान हैं. मंत्रालय की तरफ से दोबारा मूल्यांकन की घोषणा के बाद अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले डेकाथलन खिलाड़ी तेजस्विन शंकर ने नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा था:

यह देरी ना सिर्फ खिलाड़ियों और कोच का हौसला तोड़ने वाली है बल्कि यह अनादर का भी संकेत है.

इस साल अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित खिलाड़ियों में विश्व कप जीतने वाली शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख और जिम्नास्ट प्रणति नायक भी शामिल हैं. देश के सबसे बड़े खेल सम्मान खेल रत्न के साथ एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और 25 लाख रुपये का नकद इनाम मिलता है.

सूत्रों के मुताबिक 2025-26 के लिए सिर्फ पुरुष हॉकी टीम के स्टार हार्दिक सिंह का नाम ही नामित किया गया है. अर्जुन पुरस्कार के लिए 20 से अधिक खिलाड़ियों को नामित किया गया है. अगर सूची में कोई बदलाव नहीं किया जाता है तो योगासन खेल में पहली बार किसी को यह पुरस्कार मिलेगा.

अर्जुन पुरस्कार जीतने वाले को 15 लाख रुपये मिलते हैं. मंत्रालय ने देरी के कारण को लेकर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है लेकिन अनौपचारिक बातचीत में बड़े अधिकारियों ने कुछ नामित खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर चिंता जताई है कि क्या वे इस सम्मान के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करते हैं. एक अधिकारी ने कहा था:

ऐसा नहीं होना चाहिए कि हमारे पास हर जगह अर्जुन पुरस्कार पाने वाले हों लेकिन जब आप उनसे उनकी उपलब्धियों के बारे में पूछें तो दिखाने के लिए उनके पास कुछ खास नहीं हो. साथ ही उन कानूनी मामलों और मीडिया में दिए जाने वाले अजीब बयानों को भी नहीं भूलें जो तब सामने आते हैं जब कुछ लोगों को पुरस्कार नहीं मिलता.

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