मध्य प्रदेश के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी चंबल के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माल्यार्पण और गुणगान करने को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। लोधी ने कहा कि हम और रामबाबू गड़रिया दोनों सुख-दुख के साथी थे और जेल से लेकर जंगल तक हम मिलते रहे थे।
मध्य प्रदेश के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी चंबल के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माल्यार्पण और गुणगान करने को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। लोधी ने कहा कि हम और रामबाबू गड़रिया दोनों सुख-दुख के साथी थे और जेल से लेकर जंगल तक हम मिलते रहे थे।
प्रदेश के पिछोर में रविवार को लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित समारोह उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब मंच पर अहिल्याबाई होल्कर की तस्वीर के साथ चंबल के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर भी रखी गई और उस पर माल्यार्पण किया गया।
‘परिस्थितियों ने उसे डकैत बनाया था’
इस कार्यक्रम में मौजूद विधायक प्रीतम लोधी ने अपने संबोधन में रामबाबू गड़रिया को अपना सुख-दुख का साथी बताते हुए कहा कि परिस्थितियों ने उसे डकैत बनाया था। उन्होंने रामबाबू के परिवार का साथ देने का जिक्र करते हुए पाल-बघेल समाज के साथ भी हमेशा खड़े रहने का वादा किया। विधायक के इस बयान और मंच पर डकैत की तस्वीर को सम्मान दिए जाने को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
प्रीतम लोधी ने ये बातें शिवपुरी जिले के पिछोर में आयोजित पाल-बघेल समाज के कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम में लोकगायक मनोज बघेल भी मौजूद रहे। समारोह में समाज के हजारों लोग शामिल हुए। विधायक के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पहले भी चर्चा में रह चुके लोधी
प्रीतम लोधी इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने करैरा के SDOP डॉ. आयुष जाखड़ को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था करैरा तेरे डैडी का नहीं है, एसडीओपी। करैरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। अगर तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना।
विधायक ने मंच से क्या-क्या कहा
प्रीतम लोधी ने मंच से कहा- एक बहन पर बहुत अत्याचार हुआ था। उस समय मैंने उसकी आवाज उठाई थी। पांच हजार लोगों के साथ कमिश्नरी का घेराव किया था। उस दौर में लोगों को सिर्फ इतना दिखाई देता था कि एक गुंडा एक डकैत का सहयोग कर रहा है, लेकिन क्या डकैत और गुंडे इंसान नहीं होते? उन्होंने आगे कहा कि रामबाबू गड़रिया परिस्थितियों का शिकार था। उसकी परिस्थितियां मुझे अच्छी तरह मालूम थीं। समाज के कुछ लोगों ने उसे इतना परेशान किया कि वह डकैत बनने पर मजबूर हो गया। वरना रामबाबू ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो डकैत बनता। विधायक ने कहा कि उन्हें रामबाबू के जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आज भी याद हैं। मुझे उसकी जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक बात याद है। हमारी मुलाकात जेल में भी हुई थी और जंगल में भी हुई थी। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर मिला।
रिपोर्ट – अमित सिंह

