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माता-पिता खोने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, संघर्ष से जीता मैदान, गोल्ड के साथ कबड्‌डी में पहचान बना रहीं बहनें

admin by admin
April 24, 2026
in खेल
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माता-पिता खोने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, संघर्ष से जीता मैदान, गोल्ड के साथ कबड्‌डी में पहचान बना रहीं बहनें


Last Updated:April 23, 2026, 10:11 IST

Orphan Sisters Success Story: कालवाड़ तहसील के धानक्या गांव की आयुषी और पायल सोलंकी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद कबड्डी में अपनी पहचान बनाई है. माता-पिता के निधन के बाद भी दोनों बहनों ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं. परिवार और कोच के सहयोग से उन्होंने जिला और राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया. आयुषी ने गोल्ड मेडल और पायल ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर नाम रोशन किया. अब दोनों का सपना राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतना है.

कबड्डी खिलाड़ी

कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो वह क्या कुछ नहीं कर सकता. इस कहावत को कालवाड़ तहसील के धानक्या गांव में रहने वाली दो सगी बहनों ने सच साबित कर दिखाया है. आयुषी सोलंकी और पायल सोलंकी माता-पिता का साया सिर से उठने के बावजूद दोनों दो सगी बहनों ने हार नहीं मानी. उन्होंने कठिन हालातों को अपनी ताकत बनाया और कबड्डी के मैदान में शानदार प्रदर्शन कर अपना लोहा मनवाया.

कबड्डी खिलाड़ी

दोनों बहनों आयुषी और पायल का सपना है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर जयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान का नाम रोशन करें. लेकिन उनकी राह आसान नहीं रही. पिता प्रताप सिंह का 2018 में बीमारी के कारण निधन हो गया, तब पायल चौथी कक्षा में थीं. इसके बाद अक्टूबर 2025 में मां अनु कंवर का भी कैंसर से देहांत हो गया. इन कठिन हालातों के बावजूद दोनों बहनें अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं.

कबड्डी खिलाड़ी

माता-पिता दोनों को खोने के बाद आयुषी और पायल की जिंदगी में संघर्ष और भी कठिन हो गया. इस मुश्किल दौर में उनके ताऊ सुरेंद्र सोलंकी, ताई किरण कंवर और कोच जयराम गोलाडा ने सहारा बनकर उनकी जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने न सिर्फ भावनात्मक बल्कि हर संभव सहयोग देकर दोनों बहनों को आगे बढ़ने का हौसला दिया. इसी समर्थन और अपनी मेहनत के दम पर आज आयुषी और पायल राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बन चुकी हैं और अपने सपनों की ओर लगातार बढ़ रही हैं.

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कबड्डी खिलाड़ी

आयुषी और पायल को स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही कबड्डी खेलने का मौका मिला. धीरे-धीरे यह खेल उनके जीवन का लक्ष्य बन गया. 11वीं कक्षा में पहुंचते ही दोनों बहनें रोजाना करीब 3 घंटे मैदान में अभ्यास करने लगीं. कठिन मेहनत, अनुशासन और लगन का परिणाम यह रहा कि उन्होंने अपने खेल में लगातार सुधार किया. आज उनकी मेहनत रंग लाई है और दोनों बहनें जिला से लेकर राज्य स्तर तक अपनी पहचान बना चुकी हैं, साथ ही आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं.

कबड्डी खिलाड़ी

पायल सोलंकी ने वर्ष 2025 में अंडर-19 जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया. सांगानेर के बारडोली में आयोजित इस प्रतियोगिता में पायल को जयपुर जिले की बेस्ट ऑलराउंडर खिलाड़ी के रूप में ब्रॉन्ज मेडल मिला. इसके बाद उनका चयन राज्य स्तरीय टीम में हुआ. राज्य स्तर पर भी पायल ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. लगातार मेहनत और प्रदर्शन के दम पर पायल ने कबड्डी में अपनी मजबूत पहचान बनाई है.

कबड्डी खिलाड़ी

बड़ी बहन आयुषी सोलंकी ने वर्ष 2024 में अनूपगढ़ में आयोजित अंडर-17 राज्य स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता और क्षेत्र का नाम रोशन किया. उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे इलाके को गर्व महसूस कराया. आयुषी और पायल दोनों बहनों का कहना है कि उनका लक्ष्य यहीं रुकने वाला नहीं है. वे आगे राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं और इसके लिए लगातार मेहनत कर रही हैं

First Published :

April 23, 2026, 09:17 IST



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