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R Vaishali scripts history wins Candidates Tournament: आर वैशाली ने साइप्रस में आयोजित FIDE महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 जीतकर इतिहास रच दिया है. वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद, वैशाली ने शानदार वापसी करते हुए अंतिम दौर में कतेरीना लैग्नो को मात दी. अब वह विश्व चैंपियनशिप में चीन की जू वेनजुन को चुनौती देंगी. डी गुकेश के बाद वैशाली की इस जीत ने भारत को शतरंज की दुनिया के दोनों शीर्ष मुकाबलों में खड़ा कर दिया है.

शतरंज खिलाड़ी आर वैशाली ने रचा इतिहास.
नई दिल्ली. भारतीय शतरंज के इतिहास में 15 अप्रैल, 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है. साइप्रस में जब आर वैशाली ने अंतिम चाल चली, तो उन्होंने न केवल 2026 FIDE महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया, बल्कि विश्व शतरंज पटल पर भारत के दबदबे की एक नई इबारत लिख दी. वैशाली अब पहली भारतीय महिला बन गई हैं जो विश्व चैंपियनशिप के प्रतिष्ठित खिताब के लिए मौजूदा चैंपियन चीन की जू वेनजुन को चुनौती देंगी.
यह जीत केवल एक टूर्नामेंट की जीत नहीं है, बल्कि भारतीय शतरंज के उस ‘स्वर्ण युग’ का प्रमाण है जिसकी भविष्यवाणी महान विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने वर्षों पहले की थी.आनंद ने इस जीत के महत्व को समझाते हुए सटीक टिप्पणी की.उन्होंने कहा,’अब दोनों रेस (ओपन और महिला) में हमारा एक घोड़ा दौड़ रहा है. गौरतलब है कि डी गुकेश पहले ही ओपन वर्ग में विश्व चैंपियन हैं, और अब वैशाली की जीत ने भारत को दुनिया की एकमात्र ऐसी शक्ति बना दिया है जिसके पास दोनों वर्गों के ताज के लिए दावेदारी है.
शतरंज खिलाड़ी आर वैशाली ने रचा इतिहास.
एक डार्क हॉर्स का उदय
टूर्नामेंट की शुरुआत में वैशाली को मुख्य दावेदारों में नहीं गिना जा रहा था. जहां उनके भाई आर प्रज्ञानंद ओपन कैंडिडेट्स में पसंदीदा माने जा रहे थे, वहीं वैशाली को एक ‘डार्क हॉर्स’ या बाहरी दावेदार के रूप में देखा जा रहा था. पहले पांच दौर के बाद की स्थिति ने इन आशंकाओं को बल भी दिया. वैशाली अंक तालिका में सबसे निचले पायदानों पर दिव्या देशमुख और टैन झोंग्यी के साथ संघर्ष कर रही थीं. लेकिन असली चैंपियन वह नहीं जो केवल शुरुआत अच्छी करे, बल्कि वह है जो दबाव में खुद को संभाल सके। 14 राउंड के इस लंबे और थकाऊ सफर में वैशाली ने धीरे-धीरे अपनी लय हासिल की.जब अन्य खिलाड़ी थकान या मानसिक दबाव के कारण लड़खड़ा रहे थे, वैशाली ने स्थिरता का परिचय दिया. उन्होंने एलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना और टैन झोंग्यी जैसी दिग्गज खिलाड़ियों को हराकर अंक तालिका में अपनी जगह पक्की की.
अंतिम दौर का रोमांच
टूर्नामेंट के अंतिम दिन समीकरण बेहद जटिल थे. खिताब की दौड़ त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो चुकी थी. वैशाली और कजाकिस्तान की बिबिसारा असाउबायेवा शीर्ष पर बराबरी पर थीं, जबकि चीन की झू जिनर उनसे महज आधा अंक पीछे थीं. वैशाली को सफेद मोहरों के साथ कतेरीना लैग्नो के खिलाफ खेलना था. नियम स्पष्ट था. उन्हें अपनी प्रतिद्वंद्वी के परिणाम की बराबरी करनी थी और साथ ही यह उम्मीद करनी थी कि असाउबायेवा अंक गंवाएं. वह उम्मीद भारत की ही दिव्या देशमुख ने पूरी की. दिव्या ने एक कड़े मुकाबले में असाउबायेवा को ड्रॉ पर रोक दिया. अब सब कुछ वैशाली के हाथों में था. उन्होंने बिना किसी घबराहट के, बेहद सधे हुए और नियंत्रित खेल का प्रदर्शन करते हुए लैग्नो को मात दी. यह जीत कोई ‘फ्लैश फिनिश’ नहीं थी, बल्कि दबाव के क्षणों में उनकी मानसिक स्पष्टता और रणनीतिक पकड़ का परिणाम थी.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें


