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Mixed Farming Method: हरी सब्जियों की बाजार में तगड़ी मांग रहती है, किसान बताते है कि पिछले दस वर्षों से लगातार खेती कर रहे है. उनके पास थोड़ी सी ही भूमि है, ऐसे समय में वे उसी भूमि पर मिश्रित खेती करते है. जिससे प्रति बीघा में 50,000 से 60,000 रुपए का मुनाफा हो जाता है. मूली की फसल उगाने में लगभग 2,000 रुपए की लागत आती है, लेकिन एक बार जब फसल निकलना शुरू होती है तो मंडी में मांग बढ़ जाती है. बैंगन की फसल मंडी में हाथों-हाथ बिक जाती है.
फर्रुखाबाद जिले के किसान अब कम लागत में बंपर कमाई के तरीकों को जान गए है. यही कारण है कि वे धनिया की खेती में नए-नए प्रयोग करने के लिए हमेशा तत्पर रहते है. पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब किसान नगदी फसलों पर भी विशेष ध्यान दे रहे है. जिससे उनकी कमाई के रास्ते भी खुल गए है. इस खेती के जरिये किसान मोटी कमाई कर रहे है. वे अपने खेतों में मिश्रित फसलें उगा रहे है. जिससे उन्हें कम लागत में अच्छी-खासी कमाई हो रही है. प्रति बीघा 5,000 रुपए की लागत आती है. मिश्रित खेती करने वाले किसान बताते है कि वे कई दशकों से यह फसल उगा रहे है. जिससे उन्हें कभी नुकसान नहीं हुआ बल्कि लाखों रुपए का फायदा ही हुआ है.
कमालगंज के कंधरापुर गांव के निवासी किसान हर्षित कटियार ने बताया कि वे बचपन से ही मिश्रित खेती करते आ रहे है. जिससे उन्हें तगड़ी कमाई होती है. उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें कभी नुकसान नहीं हुआ. बल्कि सरकारी नौकरी करने वाले व्यक्ति से अधिक मुनाफा होता है. आमतौर पर प्रति बीघा 4,000 से 5,000 रुपए की लागत आती है. फसल तैयार होने के बाद पहले सब्जियों की बिक्री होती है. इसके बाद अन्य फसल की भी अच्छी बिक्री होती है.
हरी सब्जियों की बाजार में तगड़ी मांग रहती है, किसान बताते है कि पिछले दस वर्षों से लगातार खेती कर रहे है. उनके पास थोड़ी सी ही भूमि है, ऐसे समय में वे उसी भूमि पर मिश्रित खेती करते है. जिससे प्रति बीघा में 50,000 से 60,000 रुपए का मुनाफा हो जाता है. मूली की फसल उगाने में लगभग 2,000 रुपए की लागत आती है, लेकिन एक बार जब फसल निकलना शुरू होती है तो मंडी में मांग बढ़ जाती है. बैंगन की फसल मंडी में हाथों-हाथ बिक जाती है.
मिश्रित खेती का तरीका इस प्रकार है कि पहले मूली के पौधों की रोपाई की जाती है. फिर उसमें शलजम और चुकंदर के बीज बो दिए जाते है. इसके बाद क्यारियों के ऊपर धनिया की बुवाई की जाती है. मूली की फसल तैयार होने पर नीचे से अन्य फसलें भी तैयार होने लगती है और एक समय पर ही पांच फसल से हजारों रुपए की कमाई होती है.
खेती का तरीका यह है कि पहले खेत को समतल करके क्यारियां बनाई जाती है और मूली के पौधों को प्रति एक मीटर पर दो पौधे रोपते है. समय से सिंचाई की जाती है. जब पौधे बड़े होने लगते है तो मूली निकलने लगती है, जिसे मंडी में बेच दिया जाता है. पूरी फसल निकलने के बाद उनके पौधे को खेत में हरी खाद के रूप में प्रयोग कर लेते है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



