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Hazaribagh News: हजारीबाग की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है. खेल जगत में भी जिले का नाम रोशन कर रही हैं. इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के कोलघट्टी की रहने वाली सोनम कुमारी ने बॉक्सिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है.
हजारीबाग की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है. खेल जगत में भी जिले का नाम रोशन कर रही हैं. इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के कोलघट्टी की रहने वाली सोनम कुमारी ने बॉक्सिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है. सोनम ने दिल्ली में आयोजित डीएवी नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया है. इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों से आए बेहतरीन खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जहां कड़े मुकाबलों के बीच सोनम ने फाइनल तक का सफर तय किया और रजत पदक हासिल किया.
सोनम कुमारी की इस सफलता से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है. स्थानीय लोग उनकी मेहनत और लगन की सराहना कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए उन्हें प्रेरणा का स्रोत मान रहे हैं. लोकल 18 झारखंड से बातचीत के दौरान सोनम ने बताया कि उनके परिवार में शुरू से ही खेल के प्रति एक सकारात्मक और सहयोगात्मक माहौल रहा है. उन्होंने कहा कि उनके भाई भी क्रिकेट खेला करते थे, जिससे घर में खेल को लेकर उत्साह बना रहता था.
डीएवी नेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में किया था शानदार प्रदर्शन
सोनम ने बताया कि वर्ष 2022 में जब उन्होंने देश की महान बॉक्सर मैरी कॉम के संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में जाना, तो उन्हें बॉक्सिंग के प्रति गहरी रुचि पैदा हुई. मैरी कॉम से प्रेरित होकर ही उन्होंने इस खेल को अपनाने का फैसला किया. शुरुआत में उन्होंने घर से ही बॉक्सिंग की बेसिक ट्रेनिंग शुरू की. धीरे-धीरे जब उनकी रुचि और जुनून बढ़ता गया, तो उन्होंने प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेने का निर्णय लिया और खुद को पूरी तरह इस खेल के लिए समर्पित कर दिया.सफलता आसान नहीं थी.
बॉक्सिंग में जीता रजत पदक
इसके लिए उन्हें रोजाना करीब पांच घंटे तक कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा. नियमित अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर ही वह इस मुकाम तक पहुंच सकीं. सोनम ने यह भी कहा कि खेल के साथ-साथ वह अपनी पढ़ाई को भी उतनी ही गंभीरता से लेती हैं. वर्तमान में वह मेडिकल की तैयारी कर रही हैं और उनका हमेशा प्रयास रहता है कि पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बना रहे, ताकि किसी एक के कारण दूसरा प्रभावित न हो.सोनम की इस उपलब्धि पर उनके परिवार के सदस्य बेहद खुश हैं. उनके पिता ने बताया कि उन्होंने हमेशा अपनी बेटी पर भरोसा किया है और उसके खेल को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग दिया. उन्होंने कहा कि बेटियां अगर ठान लें, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं. सोनम कुमारी की यह सफलता न सिर्फ हजारीबाग बल्कि पूरे झारखंड की बेटियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है.


