
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
चोपन/ सोनभद्र। प्रीतनगर श्री रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के विश्राम दिवस की कथा व्यास दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने राम कथा के अत्यंत मार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया। दशरथ मरण, भरत का ननिहाल से लौटना और राम-भरत मिलन के लिए अयोध्या का चित्रकूट प्रस्थान का प्रसंग भावपूर्ण ढंग से सुनाया गया।महाराज ने कहा कि श्रीराम के वन गमन के बाद अयोध्या उजाड़ हो गई। जब सुमंत्र जी राम को छोड़कर अयोध्या लौटे और उन्होंने दशरथ जी को राम वियोग में शोक और विलाप करते हुए वर्णन किया, तो उस मार्मिक प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और वे आँसू पोंछते हुए दिखाई दिए।भरत जी का चरित्र गंगाजल जैसा पवित्र कथा व्यास ने भरत और शत्रुघ्न जी की अयोध्या वापसी और उन्हें राजा दशरथ के परलोक गमन की सूचना मिलने के बाद की मनःस्थिति का वर्णन किया। संत प्रवर ने भरत जी के भाई के रूप में चरित्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि, “भारत का भाई के रूप में जो चरित्र है वह गंगाजल की तरह पवित्र है।”उन्होंने बताया कि महर्षि वशिष्ठ और माता कौशल्या के आग्रह के बावजूद, भरत जी ने राजसिंहासन स्वीकार नहीं किया और अपने बड़े भाई श्रीराम को वापस लाने के लिए चित्रकूट प्रस्थान करने की घोषणा की। इस पर संपूर्ण अयोध्या नगरी उनके साथ चलने के लिए तैयार हो गई। भरत जी के मन में श्रीराम के प्रति प्रेम को दर्शाते हुए संगीतमय भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु राम भक्ति में सराबोर होकर खूब झूमे। संचालन मनोज चौबे ने किया| इस दौरान महंथ अचलेश्वर महादेव मंदिर पं मुरली तिवारी, राजा मिश्रा, दयाशंकर सिंह, आईओडब्लू आर बी पाल,सीआईटी उमेश सिंह, दिनेश पाण्डेय एडवोकेट, संजीव तिवारी, गणेश तिवारी, कमल किशोर सिंह,हिरामणी तिवारी, संदीप अग्रवाल, श्याम सुंदर मिश्रा, लालजी मिश्रा, राजेश अग्रहरी, धर्मेंद्र जायसवाल, अरविंद उपाध्याय, बबलू सोनी, दीनदयाल सिंह, अनील यादव, जयशंकर पाण्डेय, धिरेंद्र चौबे, अंकित सोनी,पवन यादव सहित भारी संख्या में कथाप्रेमी मौजूद रहे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रभारी निरीक्षक कुमुद शेखर सिंह मयफोर्स चाक-चौबंद रहे|

