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Ballia Hindi News: किसान कल्याण सेवा संस्थान बलिया के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि, इस सत्र के शुरुआती से अब तक जिले में समयानुसार बारिश न होने के कारण अधिक जमीन पर किसान अपनी मनचाही फसल नहीं लगा सके. इसके बावजूद दूसरी समस्या तब आई जब सितंबर महीने ज्यादा बारिश हो गई और मक्के जैसी प्रमुख फसल बर्बाद हो गई. यही नहीं, इसके बाद भी धान की लहलहाती फसल से किसानों को काफी उम्मीद था और धान की खेती भी बहुत अच्छी थी. किसान ने खेत में समयानुसार सिंचाई और रोगों से बचाव का हर संभव प्रयास भी किया था. धान की फसल पैदा भी हो गई. लेकिन मोंथा तूफान ने शानदार फसल पर पानी फेर दिया.
Farmers crops ruined: किसानों का मुस्कुराता चेहरा अचानक मायूसी में बदल गया है. धान की शानदार खेती से किसानों ने तमाम सपने संजोए थे, लेकिन अधिक उपज की उम्मीद पर मोंथा तूफान ने पानी फेर दिया है. खेत में अब तैयार हो चली खड़ी फसल गिरकर सड़ रही है. यह समस्या पूरे जिले के किसानों के लिए गंभीर बन गई है. इस साल किसानों को खेती में भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. यही नहीं, अधिकतर अगेती आलू की बुवाई भी कर चुके हैं. आइए जानते हैं किसानों से वर्तमान हालात क्या है, कौन-कौन सी फसलें प्रभावित है और आगे क्या कुछ रहेगा.. वैसे जिलेभर के किसानों ने डीएम को पत्रक भी सौंपा है.
किसान कल्याण सेवा संस्थान बलिया के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि, इस सत्र के शुरुआती से अब तक जिले में समयानुसार बारिश न होने के कारण अधिक जमीन पर किसान अपनी मनचाही फसल नहीं लगा सके. इसके बावजूद दूसरी समस्या तब आई जब सितंबर महीने ज्यादा बारिश हो गई और मक्के जैसी प्रमुख फसल बर्बाद हो गई. यही नहीं, इसके बाद भी धान की लहलहाती फसल से किसानों को काफी उम्मीद था और धान की खेती भी बहुत अच्छी थी. किसान ने खेत में समयानुसार सिंचाई और रोगों से बचाव का हर संभव प्रयास भी किया था. धान की फसल पैदा भी हो गई. लेकिन मोंथा तूफान ने शानदार फसल पर पानी फेर दिया. तेज हवा के चलते खड़ी फसल पानी में गिर गई, जो अब सड़ रही हैं और जो खड़ी है उसकी कटाई संभव नहीं है.
पत्रक सौंपकर मुआवजा की मांग
किसान कल्याण सेवा संस्थान उपाध्यक्ष धीरेंद्र राय ने कहा कि, वह जिले के पूर्णरूपेण प्रगतिशील किसान है. अभी उनके खेत में केला लगा हुआ है और धान की फसल सड़ रही है. जिलेभर के किसानों ने बलिया डीएम मंगला प्रसाद सिंह को पत्रक सौंपकर मुआवजा की मांग की है. इसमें किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से लेकर अन्य तरीकों से भी अपनी पूंजी को लगाया था, जिसे मोंथा तूफान ने बर्बाद कर दिया है. किसानो का मानना है कि, वह अब तो रबी की फसल भी नहीं बुवाई कर पाएंगे. जिस प्रकार से पराली जलाने पर करवाई की जाती है, ठीक उसी तरह सर्वे कराकर डीएम अपने आपदा प्रबंधन से मुआवजा दे, ताकि आगे की खेती में तुरंत कुछ राहत मिल सके.
किसानों का सर्वे कराकर मदद करें
किसान अजय पाण्डेय ने कहा कि, अगेती आलू की बुवाई किसान दीवाली से लेकर छठ तक लगभग 90% कर दिए हैं, जो अब सड़ रही हैं. अब आलू के बैठने की कोई संभावना नहीं है. हालत बहुत बूरा है. सरकार बलिया के किसानों का सर्वे कराकर मदद करें. देवानंद राय ने बताया कि, उनको अब केवल मीडिया पर ही भरोसा है. उनका केवल 2 एकड़ जमीन है, जिस पर एक लाख का केसीसी लिए है, जिसमें एक का सवा लाख भरना पड़ता है. कई बार इनका 1500 का बीमा भी कट गया, लेकिन इनका दावा है कि इन्हें राहत के रूप 15 पैसा आज तक नहीं मिला है, इस बार भी घाटा का ही सामना करना पड़ रहा है.

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें
काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की… और पढ़ें



