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Paddy farming Tips : अगर धान की खेती में चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवार तेजी से फैल रहे हैं तो घबराएं नहीं. किसान भाई सिर्फ दो दवाओं का एक खास कॉम्बिनेशन छिड़क दें और देखें कमाल. यह मिश्रण न सिर्फ खरपतवार को जड़ …और पढ़ें
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि धान की फसल में चौड़ी पत्ती और सकरी पत्ती वाले खरपतवार एक आम समस्या हैं. ये खरपतवार न केवल धान के दानों की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, बल्कि उनके वजन को भी कम कर देते हैं. खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए किसानों को अक्सर खरपतवार नाशक और मजदूरों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है. जिससे खेती की कुल लागत बढ़ती है. इसलिए, समय पर खरपतवारों का नियंत्रण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि पैदावार अच्छी हो और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके.
चौड़ी पत्ती के खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए धान की रोपाई के 15 से 20 दिनों के बाद जब खरपतवार दो से तीन पत्ती के हो जाएं. उस समय खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव कर दें. खरपतवार नियंत्रण के लिए मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 10% और क्लोरीमुरान 10% (METSULFURON METHYL 10% + CHLORIMURON ETHYL 10%) नाम की दवा में 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर दें. ध्यान रखें कि छिड़काव करते वक्त खेत में पानी भरा हुआ ना हो बल्कि पर्याप्त नमी होना आवश्यक है. दवा का छिड़काव करने के 24 घंटे के बाद धान की फसल में पानी दे दें. एक सप्ताह में खरपतवार पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे.
देसी तरीका भी कारगर
रासायनिक तरीके से खरपतवारों का नियंत्रण करने के अलावा देसी तरीके से भी खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सकता है. किसान धान की फसल में निराई- गुड़ाई करके खरपतवारों को नष्ट कर सकते हैं. जिससे वायु संचार बेहतर होगा. पौधों की बढ़वार बेहतर होगी.
