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आज पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नाम से मशहूर जंगल महज एक सामान्य जंगल हुआ करता था. इन सामान्य जंगलों से वन्यजीव विहार और टाइगर रिजर्व तक का दर्जा दिलाने के लिए पीलीभीत के कुछ वन्यप्रेमियो ने खासी जद्दोजहद की थी, 30 …और पढ़ें
हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित पीलीभीत जिला प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का अद्भुत उदाहरण है. यहां स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में बाघ संरक्षण के लिए एक अहम स्थान रखता है. करीब 73,000 हेक्टेयर में फैले इस जंगल में 71 से अधिक बाघ, तेंदुए, भालू और 350 से भी ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं. पीलीभीत के जंगलों को 9 जून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था. लेकिन इस घोषणा से पहले लगभग 30 वर्षों का संघर्ष भी छिपा हुआ है.
वरिष्ठ वन जीवन पत्रकार केशव अग्रवाल ने लोकल 18 से कहा कि पीलीभीत के जंगलों में हमेशा से ही बाघों की अच्छी संख्या देखी गई है. इसी को देखते हुए स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों की ओर से 80 के दशक इस जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिलाने की मांग उठायी जा रही. सामान्य जंगल पेड़ों के छपान के ज़रिये होने वाली आमदनी के चलते सरकार की आय का एक अच्छा स्रोत होते हैं ऐसे में इस मांग को लगातार नकारा जा रहा था. लगभग तीन दशकों तक चले लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2014 में सफलता मिल सकी. जिसका नतीजा है कि आज पीलीभीत के जंगल और बाघ दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते हैं.
टाइगर रिजर्व 15 जून से 15 नवम्बर तक बंद रखा
अगर आप भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सैर का प्लान बना रहे हैं तो फिलहाल आपको नवंबर महीने तक का इंतजार करना होगा. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी गाइडलाइंस के अनुसार मॉनसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव अभयारण्यों को 15 जून से 15 नवम्बर तक बंद रखा जाता है.


