
ब्यूरो रिपोर्ट श्याम अग्रहरी।
प्रसव कक्ष के पास ही दीवार पर लिखा गया है कि प्रसव अपस्ताल में ही कराये, मां बच्चा स्वस्थ पायें, और जननी सुरक्षा का लाभ 1400 रूपये पायें।
लेकिन यहां उलट प्रसूताओं से ले लिए जा रहे 1500 से 1800 रुपए।
जबकि बगल के ही दीवार पर लिखा है कि प्रसव सेवा मुफ्त है किसी को पैसा ना दे । नजराना देना मना है।
सोनभद्र। दुद्धी जहां एक तरफ सरकारी अस्पताल में गरीबों को बेहतर सुविधा के साथ बेहतर उपचार देने के लिए सरकार प्रयासरत है और प्रसूताओं के लिए निःशुल्क प्रसव सहित उनको सुविधाएं उपलब्ध कराती है ऐसे में दुद्धी में जो गरीब आदिवासी तबके में इकलौता सरकारी अस्पताल सी एच सी सेंटर उपलब्ध है वहां पर प्रसव कराने हेतु भर्ती महिलाओं से प्रसव के बाद पैसे लेने का मामला सामने आया है । आरोप है कि दुद्धी सी एच सी में प्रसव कराने आयी प्रसूता श्रेया देवी पत्नी राजेंद्र प्रसाद निवासी बीड़र का सोमवार को दोपहर दो बजे बच्चे को जन्म देती है उसके कुछ घंटे बाद उनके साथ आए अभिभावक भागमति पत्नी राजेश निवासी रनू से 3000 रुपए प्रसव के लिए मेहनतनामा के नाम पर मांग किया जाने लगा आना कानी में पहली बार में 1500 रुपए लिए गए फिर दूसरी बार में 300 रूपये ले लिए गए । पैसे देने वाले अभिभावक का कहना है कि हमलोग मजदूर व्यक्ति है मेहनत करके पैसा कमाते है और मेहनत का पैसा अपना देना पड़ा है । इनका कहना है कि ये लोग जानते है कि सरकारी अस्पताल में सारा काम फ्री में होता है फिर भी इनको पैसा देना पड़ा।
वही दूसरा मामला समा बानो पत्नी फिरोज आलम निवासी बीरबल झारखंड मायका दीघुल यूपी सोमवार को दोपहर ढाई बजे बच्चे को जन्म दिया उसके कुछ घंटे बाद उनके साथ आए लोगों से 2000 का डिमांड किया गया जिसपर 1500 लेके बात बनी ।
वही एक भर्ती प्रसूता ने आरोप लगाते हुए बताया कि उन्हें प्रसव कराए करीब 24 घंटे हो गए लेकिन अस्पताल के तरफ से खाने पीने हेतु कुछ उपलब्ध नहीं कराया गया । अब तक जो खा पी रहे है वो घर का लाकर खा पी रहे है ।
इस प्रकार ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते दिनों में कितनों से इस प्रकार का डिमांड और वसूली की गई होगी । सवाल ये है कि प्रसूता को खाने पीने के लिए आवश्यक चीजें अस्पताल से क्यों नहीं दी जा रही । सवाल ये भी उठता है कि चिकित्सा अधीक्षक अपने अस्पताल का कितना ही निरीक्षण करते होंगे । खैर गरीबों से मनमाना पैसा लेने के मामले में व प्रसूता को आवश्यक और समय से खाने पीने हेतु सामग्री उपलब्ध ना कराने पर आला अधिकारी क्या कार्यवाही करते है देखने की बात है।
