मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित खड़े हनुमान मंदिर को लेकर अब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी उठ खड़ी हुई हैं। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक लेटर लिखा है। वहीं, सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा है कि सभी संबंधित पक्षों की सहमति के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित खड़े हनुमान मंदिर को लेकर अब प्रशासन के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही है हिंदूवादी संगठन, श्रद्धालु,के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर प्लान बदलने का अनुरोध किया है। वहीं, सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा है कि आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर सभी संबंधित पक्षों की सहमति के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। हालांकि, प्रशासन की ओर से बुधवार को खड़े हनुमान की मूर्ति की गहराई की जांच आईआईटी विशेषज्ञों से कराने की बात कही गई थी। गुरुवार को पूरे दिन मंदिर परिसर में जांच टीम के पहुंचने को लेकर कोई गतिविधि नजर नहीं आई। पुजारी महेश बैरागी ने बताया किं प्रशासन की ओर से उन्हें जांच टीम के आने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।
उज्जैन में सिहस्थ 2028 को लेकर कंठाल से छत्री चौक सड़क चौड़ीकरण मार्ग में आरहे खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संतों के विरोध के बाद अब भाजपा के नेता भी सामने आ रहे हैं। गुरुवार देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया है। पत्र में खड़े हनुमान मंदिर के लिए सड़क निर्माण का प्लान बदलने का सुझाव दिया गया है। वहीं, सांसद फिरोजिया ने कहा कि खड़े हनुमान जी का विषय सीधे जनता की आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। ऐसे संवेदनशील मामले में प्रशासन को सर्वसमाज, साधु-संतों, व्यापारियों, मंदिर से जुड़े लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ पहले ही बैठक कर चर्चा करना चाहिए थी। आगे जो भी निर्णय लिया जाए, वह सभी संबंधित पक्षों की सहमति से हो, ताकि किसी की धार्मिक आस्था और भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
सोशल मीडिया पर मिले पत्र में उमा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं उज्जैन के हैं और शहर के धार्मिक स्थलों की गरिमा और जनता की आस्था को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने भोपाल में सड़क चौड़ीकरण के दौरान धार्मिक स्थल को प्रभावित किए बिना प्लान में बदलाव किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने खड़े हनुमान के मामले में भी सड़क निर्माण की योजना में करने का सझाव दिया।
प्रतिमा लॉकिंग पद्धति से जुड़ी
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी का कहना है कि नगर निगम की टीम ने आसपास की दीवारें और गुंबद हटाया तो पाया कि प्रतिमा लॉकिंग पद्धति पर टिकी है। इसे सीधे उठाने पर विग्रह होकर बिखरने का खतरा है। इसके बाद इंदौर के विशेषज्ञों और आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट को बुलाया गया। उन्होंने 5-6 फीट के गड्ढे खुदवाकर जांच की और बताया कि आधुनिक इक्विपमेंट जैसे GPR और स्कैनिंग मशीनों के बिना इसे सुरक्षित हटाना संभव नहीं है। इसके बाद SGSITS और IIT की टीम ने भी दौरा किया था और स्कैनिंग मशीनों के साथ दोबारा आने की बात कही थी, लेकिन वे अभी तक नहीं आए हैं।
प्रशासन के सामने चुनोतियां
खड़े हनुमान जी की प्रतिमा अब प्रशासन के लिए चुनोती बनता जा रहा है। हनुमान दर्शन के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। एक और प्रशासन सड़क निर्माण की योजना को लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर खड़े हनुमान को विस्थापित नहीं करने की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में प्रशासन के सामने सड़क निर्माण और धार्मिक आस्था के बीच सर्वमान्य समाधान निकालने की चुनौती से जूझ रहा है। इसके आगे के काम रुके पड़े है जिससे समय पर पूरा ना होने की संभावना जताई जा रही हैं।
दर्शन करने पहुंचीं स्वामी हर्षानंद गिरि
छोटा सराफा स्थित खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच गुरुवार सुबह साधु-संतों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इसी दौरान मॉडल से साध्वी और अब स्वामी हर्षानंद गिरि बनीं हर्षा रिछारिया ने खड़े हनुमान के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने एक बार फिर अपने जीवंत होने का प्रमाण दिया है। हनुमान लला ने संकेत दिया है कि वे यहां से जाना नहीं चाहते। यहां अयोध्या जैसी स्थिति न बने और भव्य मंदिर बने, ताकि भक्त यहीं दर्शन कर सकें।
दूसरा रास्ता निकालने की मांग
महामुक्तेश्वरी धाम के पीठाधीश्वर पंडित शंकर लक्ष्मी नारायण जोशी ने मंदिर को हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से दूसरा रास्ता निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि जब नीलगंगा से लोटस स्कूल की ओर जाने वाले मार्ग में बीच में आ रही चिमनी को बचाकर उसके आसपास से सड़क निकाली जा सकती है, तो खड़े हनुमान मंदिर के लिए ऐसा विकल्प क्यों नहीं तलाशा जा रहा।
प्रशासन के दावों पर आपत्ति जताई
पंडित शंकर जोशी ने प्रशासन के उन कथित दावों पर भी आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाया गया तो उसका ढांचा टूटा कैसे? उन्होंने सवाल किया कि क्या मंदिर हवा में टूट गया या कोई आंधी-तूफान आ गया था? उन्होंने कहा कि मौके की स्थिति देखकर लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और मंदिर को हटाने के बजाय समाधान तलाशना चाहिए।
अधूरे मंदिर में कैसे स्थपित हो
बताया जा रहा है कि मंदिर प्रबंधन की सहमति के आधार पर वार्ड नंबर 20 में पानी की टंकी हटाकर खाली की गई 20.90 वर्गमीटर जमीन मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए उपलब्ध कराई गई है। उज्जैन नगर निगम ने खड़े हनुमान मंदिर के लिए जगह देने का पत्र 2 सितंबर को जारी किया था। यह पत्र मंदिर के पुजारी की मांग के बाद जारी किया गया था। हालांकि, मंदिर अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। अगर मंदिर की यहां स्थपित किया जाता है तो दक्षिण मुखी हनुमान उत्तर मुखी हो जाएंगे।



