झीरम घाटी हमले के मामले में जगदलपुर में एनआईए की विशेष अदालत ने दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को शनिवार को दोषी करार दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई थी, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में साल 2013 में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हुए भयानक हमले में पार्टी के कई बड़े नेताओं समेत कुल 29 लोग मारे गए थे। वहीं इस हमले के 13 साल बाद शनिवार को इस मामले में NIA की एक स्पेशल अदालत का फैसला आया, जिसमें उसने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। इन 10 लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्या चरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत 29 लोग मारे गए थे, साथ ही राज्य में कांग्रेस की टॉप लीडरशिप लगभग खत्म हो गई थी। अब अदालत 16 सितंबर को दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। भले ही अदालत ने इन 10 लोगों को दोषी ठहरा दिया हो, लेकिन कुछ दोषियों के परिवार वाले इस जानलेवा हमले में उनके शामिल होने के आरोपों पर सवाल उठा रहे हैं।
अदालत ने इस मामले में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम, कवासी कोसा, आयता मरकाम, जोगा मडकमी, मडकामी देवा, मुक्का मंडावी, सुमित्रा मोडियम, बंजामी सन्ना को दोषी करार दिया। उधर दोषी ठहराए गए जोगा मरकाम (जिसे जोगा मडकामी के नाम से भी जाना जाता है) के परिवार वालों ने फैसले का विरोध करते हुए जोगा को गलत तरीके से इस मामले में फंसाने का आरोप लगाया। मरकाम के भाई दुर्जन मरकाम का कहना है कि उनके भाई को न तो तीर चलाना आता था और न ही बंदूक चलानी आती थी। इसके बाद भी उन्हें इस मामले में फंसा दिया गया।
दुर्जन ने साथ ही इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और आखिरी फैसले की तारीखें बार-बार बदलने पर भी अपनी नाराजगी जताई और इस बारे में ANI से बात करते हुए कहा, ‘मेरे बड़े भाई जोगा मरकाम हैं। झीरम घाटी की घटना में उनका कोई हाथ नहीं था। उन्हें यह कहकर फंसाया गया कि वह इस हमले में शामिल थे। हमें 31 अगस्त को बताया गया था कि उस दिन फैसला सुनाया जाएगा। जब हम उस दिन आए, तो उन्होंने कहा कि फैसला 5 तारीख को होगा। आज वे कह रहे हैं कि आज नहीं होगा, 16 तारीख को आना। वे ऐसा कह रहे हैं… इसका क्या मतलब है?’
उधर दोषी ठहराए गए एक अन्य शख्स कवासी कोसा के परिवार वालों ने भी ऐसे ही दावे किए। कवासी के भाई गुड्डू ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भाई और मुक्का मंडावी को भी इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि जब हमला हुआ, तब कोसा कवासी परिवार में होने वाली एक शादी की तैयारियों में लगे थे, जबकि मुक्का मंडावी भी गांव में शादी की तैयारियों में व्यस्त था।
पीटीआई के साथ हुई बातचीत में गुड्डू ने बताया, ‘हमले के समय वे वहां पर मौजूद नहीं थे। जो लोग इसमें शामिल थे, उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है और अब वे सम्मान के साथ आजादी से रह रहे हैं, जबकि जो लोग शामिल नहीं थे, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है और वे सजा भुगत रहे हैं। ऐसे में उनके परिवार के लोग परेशान हैं और टूट चुके हैं।’
उधर बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने बताया कि जगदलपुर में एनआईए के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई थी, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
भाषा के साथ बातचीत में वकील ने कहा, ‘हम इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। हमें अभी तक फैसले की प्रति नहीं मिली है। इसके बाद ही अपील के आधार के बारे में बता पाएंगे।’ उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष ने अपना पक्ष मजबूती से रखा और उम्मीद है कि आरोपियों को उच्च न्यायालय से न्याय मिलेगा।
बता दें कि कांग्रेस नेताओं पर यह हमला 25 मई 2013 को उस वक्त हुआ था, जब वे पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ में शामिल होने के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान माओवादियों ने बस्तर जिले में दरभा पुलिस स्टेशन इलाके में स्थित झीरम घाटी में एक नेशनल हाईवे पर घात लगाकर उनपर हमला किया था। इस वारदात में मारे गए लोगों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। कांग्रेस की यह परिवर्तन यात्रा उस साल के आखिर में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित की गई थी।



