मध्य प्रदेश के उज्जैन से झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। खुद को अघोरी बताने वाली महिला को जलती चिता से इंसानी मांस निकालकर खाते देखा गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में खुद को अघोरी बताने वाली एक महिला की पैशाचिक हरकत सामने आई है। उसे जलती चिता से इंसानी मांस निकालकर खाते देखा गया। गुरुवार को एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली खुद को अघोरी बताने वाली काली नंद गिरी को उज्जैन जिले में चिता से इंसानी मांस खाते हुए वीडियो में देखे जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि उज्जैन के श्मशान घाट में रहने वाले विष्णुनाथ महाराज की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 301 के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 301 कब्रिस्तान या श्मशान में बिना इजाजत घुसने, अंतिम संस्कार में बाधा डालने या मानव शव का अपमान करने से संबंधित है। शर्मा ने कहा कि उसे मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने उसे 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
कथित वीडियो में आरोपी महिला हाथ में तलवार लिए जलती हुई चिता के पास खड़ी दिखाई देती है। उसके बाद वह तलवार से चिता से मांस का एक टुकड़ा निकालकर किनारे रखती है। फिर वह मांस के उस टुकड़े को खाती हुई दिखती है। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। उज्जैन के जीवाजीगंज थाने को मिली शिकायत के अनुसार, काली नंद गिरी का जन्म एक पुरुष के तौर पर हुआ था। उसका नाम अल्लूरी श्रीनिवास था। अब उसने ट्रांसजेंडर की पहचान धारण कर ली है।
पुलिस इस महिला अघोरी की कमाई के जरिया का पता लगा रही है। सोशल मीडिया पर उसे उज्जैन की ‘लेडी अघोरी’ के नाम से जाना जाता है। उसके वीडियो अक्सर मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर शूट किए जाते हैं, जिनमें आध्यात्मिक अनुष्ठान और सनातन धर्म पर उसकी बातें होती हैं।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरी के बैकग्राउंड की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच तब शुरू हुई जब शिकायतें मिलीं कि उसने तेलंगाना में एक छात्रा को धोखा दिया और एक तांत्रिक अनुष्ठान करने के बहाने एक दूसरी महिला से 10 लाख रुपए लिए। एसपी ने कहा कि हम इन मामलों के बारे में जानकारी और उसकी आय के स्रोतों का पता लगा रहे हैं।
समाचार एजेंसी पीटीाई के अनुसार, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा कि अघोरी साधना को गुप्त रखना जरूरी है। इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। जो भी साधक इसे सार्वजनिक करता है, उसके धोखेबाज होने की संभावना होती है। यह समझना जरूरी है कि इंसानी मांस खाने जैसी हरकतें पैशाचिक हरकत की श्रेणी में आती हैं।



