उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराधियों पर तबाड़तोड़ ऐक्शन हुए हैं। 20 दिन में पुलिस ने साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज कर 2.40 करोड़ रुपये फ्रीज कराए और करीब 41 लाख पीड़ितों को वापस भी करा दिए।
यूपी में लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की साइबर थाने और क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट गिरोह के खिलाफ ऑपरेशन डिजिटल कवच का अभियान चलाकर ताबड़तोड़ कार्रवाई की। 20 दिन में पुलिस ने साइबर अपराधियों के खातों को फ्रीज कर 2.40 करोड़ रुपये फ्रीज कराए और करीब 41 लाख पीड़ितों को वापस भी करा दिए।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के मुताबिक लगातार बढ़ते साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा के निर्देश पर ऑपरेशन डिजिटल कवच का अभियान चलाया गया। एक अगस्त से 20 अगस्त तक साइबर थाने और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। अभियान में डिजिटल अरेस्ट गिरोह से जुड़े साइबर अपराधियों के 100 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कराकर 2.40 करोड़ रुपये होल्ड कराए गए। इसके साथ ही साइबर क्राइम सेल की ओर से करीब 17 लाख रुपये पीड़ितों के खाते में वापस कराए गए। वहीं, साइबर थाने ने 24 लाख रुपये वापस कराए। अभियान मुख्य रूप से डिजिटल अरेस्ट गिरोह के खिलाफ चलाया गया। इसके अलावा अन्य साइबर फ्राड पर भी काम किया जा रहा है।
दरअसल जालसाज लगातार खुद को पुलिस, सीबीआइ, ईडी, एनआईए, एटीएस, ट्राई का बताकर लोगों को वीडियो काल कर रहे हैं। उन्हें टेरर फंडिंग, मनी लांड्रिंग और गिरफ्तारी का भय दिखाकर मानसिक दबाव बनाते हैं। इसके बाद खाते में रकम ट्रांसफर करा ली जाती है। एडीसीपी के मुताबिक क्राइम ब्रांच तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान कर उनके नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जरूरत पड़ने पर अंतरराज्यीय स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही है। साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
साइबर क्राइम
कोई भी सुरक्षा एजेंसी डिजीटल अरेस्ट नहीं कर सकती
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के मुताबिक कोई भी एजेंसी अथवा पुलिस किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है न कर सकती है। ऐसे मामलों में सजगता ही बचाव है। इस लिए हम अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करते हैं। अगर आप जागरुक हैं तो कोई भी साइबर अपराधी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। डिजिटल अरेस्ट का कहीं कोई प्रावधान ही नहीं है। बैंक खाते से जुड़ा कोई भी ओटीपी और एटीएम से जुड़ी जानकारी किसी अजनबी से साझा न करे। यह भी हमेशा ध्यान रहे कि बैंक मैनेजर भी आपसे पिन नम्बर नहीं पूछ सकता है।
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरन्त 1930 पर कॉल करें :
साइबर मामलों की विशेषज्ञ अनुषांगी खेमका मुताबिक साइबर ठगी का शिकार हो जाने पर तुरन्त हेल्पलाइन नम्बर 1930 पर फोन करना चाहिये। साथ ही हेल्पलाइन से जो भी सवाल पूछे जाए, उन्हें सही-सही बताना चाहिये। इस नम्बर के अलावा cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है।
– ऐसी काल आती है तो घबराये नही सीबीआई, ईडी, कस्टम या पुलिस आपको वीडियो काल पर गिरफ्तार नहीं करते हैं।
– घबराएं नहीं स्थिति का आकलन करने के लिए कुछ समय लें और अपने परिजनों से जानकारी जरूर साझा करें।
– व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें जैसे पता, सामाजिक सुरक्षा संख्या, या वित्तीय विवरण न दें।
– पहचान मांगें कॉल करने वाले का नाम, बैज नंबर, और जिस थाने से वे हैं, वह पूछें। असली पुलिस अधिकारी यह जानकारी देंगे।
– कॉल की पुष्टि करें, फोन काटकर अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन पर सीधे कॉल करें (कॉलर द्वारा दिए गए नंबर का उपयोग न करें) ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि उन्होंने आपको कॉल किया था।
– नंबर ब्लॉक करें, अगर संभव हो, तो नंबर को ब्लॉक करें ताकि भविष्य में और कॉल न आ सकें।



