मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की NICU में शनिवार तड़के वार्मर में आग लगने से तीन नवजात इसकी चपेट में आ गए। दो बच्चे झुलस गए, जबकि एक की जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे के समय NICU में 33 नवजात भर्ती थे, जिनमें से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में शनिवार तड़के बड़ा हादसा हो गया। एक वार्मर में अचानक आग लगने से उसमें रखे तीन नवजात इसकी चपेट में आ गए। हादसे में दो नवजात झुलस गए, जबकि एक नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद तीनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।
हादसा शनिवार तड़के करीब 1:50 बजे हुआ। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक वार्मर की हीटिंग यूनिट के फिलामेंट में स्पार्क होने के बाद आग लगी। उस समय वार्मर के अंदर तीन नवजात मौजूद थे। आग लगते ही अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत बच्चों को वार्मर से बाहर निकाला और आग बुझाई।
NICU में भर्ती थे 33 नवजात
घटना के समय NICU में कुल 33 नवजात भर्ती थे। इनमें से तीन बच्चे उस वार्मर में थे, जबकि बाकी 30 नवजातों को कर्मचारियों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आग लगने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने तत्काल बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
छिंदवाड़ा की सिविल सर्जन कंचन दुबे ने बताया कि आग दिखाई देने के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की और बच्चों को बाहर निकाला। घायल नवजातों की विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच की। इस दौरान छिंदवाड़ा जिला मेडिकल कॉलेज के डीन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट समेत अन्य चिकित्सकों ने भी बच्चों की स्थिति का जायजा लिया।
एक नवजात की जबलपुर में मौत
घायल तीनों नवजातों को बेहतर और विशेषज्ञ उपचार के लिए एंबुलेंस से जबलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बच्चों को ले जाने के दौरान उनके साथ डॉक्टर भी मौजूद रहे। हालांकि इलाज के दौरान एक नवजात की मौत हो गई, जबकि दो अन्य बच्चों का इलाज जारी है।
छिंदवाड़ा में पीडियाट्रिक सर्जन नहीं
हादसे के बाद अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। घायल नवजातों को जबलपुर रेफर किए जाने की एक वजह छिंदवाड़ा अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जन का उपलब्ध नहीं होना भी बताई गई है। ऐसे में गंभीर स्थिति वाले नवजातों के इलाज के लिए उन्हें दूसरे शहर ले जाना पड़ा।
वार्मर और अन्य उपकरणों की जांच
घटना के बाद अस्पताल कर्मचारियों ने वार्मर समेत NICU में लगे अन्य उपकरणों का निरीक्षण किया। तकनीशियनों को भी बुलाकर वार्मर और दूसरे इलेक्ट्रिकल उपकरणों की जांच कराई गई। अस्पताल में भर्ती अन्य नवजातों के परिजनों में भी घटना को लेकर चिंता देखी गई।
सिविल सर्जन कंचन दुबे ने फिलहाल किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। उनका कहना है कि शुरुआती तौर पर घटना दुर्घटना प्रतीत होती है और प्रशासनिक अधिकारी मामले की जांच करेंगे।
अब अस्पताल प्रशासन की विस्तृत जांच में यह पता लगाया जाएगा कि वार्मर में आग किस वजह से लगी, उपकरण की स्थिति कैसी थी और NICU में लगे अन्य विद्युत उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी दुरुस्त है। जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह और किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय हो सकेगी।


