उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में सेकड़ों मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर यूजीसी कानून को मानने से इंकार किया।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में UCC कानून के विरोध में सैंकड़ों की संख्या में बुर्का और हिजाब पहन कर मुस्लिम महिलाएं सड़क पर उतर गई हैं। इन दौरान मुस्लिम महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंची। इन तख्तियों पर लिखा,काला कानून वापस लो,धर्म निरपेक्षता जिंदाबाद,शरीयत में छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जाएगी। इस दौरान महिलाओं ने सरकार को चेताया की मुस्लिम लॉ के तहत निकाह हमारा, फैसला हमारा,शरीयत में दखल मंजूर नही करेंगे। UGC को लेकर महिलाओं के समर्थन देने पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम उनको बताना चाहते हैं कि ये स्पष्ठ नही है। कुछ बाते जानने की जरूरत है। इस दौरान तीन थानों के थाना प्रभारी सहित एसडीएम, सीएसपी ओर पुलिस के जवान तैनात रहे।
उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में रविवार सेकड़ों की संख्या में मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर UGC द्वारा बनाए कानून को मानने से इंकार किया। उन्होंने आरोप लगाए की यह कानून तीन तलाक,विवाह सहित कई मामलों में स्पष्ठ नहीं है।इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। मंच पर महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं, जबकि सामने एकत्रित महिलाओं के हाथों में तख्तियां और तिरंगे झंडे देखे गए। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर है, जिन्हें वे अपने धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मानती हैं। डॉक्टर फौजिया अंजुम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को केवल समानता के नाम पर विधेयक का समर्थन करने के बजाय उसके प्रावधानों को गहराई से समझना चाहिए।
राष्ट्रपति को ज्ञापन में पुर्नविचार की मांग
बताया जा रहा है कि 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर उज्जैन की मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक- 2026 को लेकर विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। कमेटी ने राष्ट्रपति से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करना शामिल है। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, सभी प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श और मुस्लिम या अन्य धर्म-निर्देशित समुदायों को कानून में अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है।
प्रदर्शन में शामिल शाइस्ता परवीन शेख ने कहा कि महिलाएं संविधान और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई हैं। प्रसासनिक अधिकारों ज्ञापन में संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। कमेटी ने अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।
पार्षद नाजिया कुरैशी ने बताया कि यह प्रदर्शन मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और शरीयत से जुड़े मामलों को लेकर है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा UCC के समर्थन की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट- विजेन्द्र यादव



