झारखंड में 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन स्थगित हो गया। छात्रों ने कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने को बहुत बड़ी जीत बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो दो महीने के बाद इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस बीच, परीक्षाओं को रद्द करने के खिलाफ हाई कोर्ट में आज सुनवाई होगी
झारखंड की राजधानी रांची में 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन स्थगित हो गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में दोनों गुटों ने बुधवार को अपने-अपने आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया। इसके बाद जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच ने शाम में आभार यात्रा निकाली। इससे पूर्व न्याय मंच ने सुबह ही अपने आंदोलन की समाप्ति की घोषणा कर दी थी। रिफार्म मंच में अनशन पर बैठे तीन छात्रों को पद्मश्री मधु मंसूरी और कोतवाली इंस्पेक्टर सनोज कुमार ने जूस पिलाकर और माला पहनाकर अनशन तुड़वाया।
रिफॉर्म मंच के रविंद्र पासवान ने कहा कि हम छात्र अपनी मांगों को लेकर पिछले 26 दिनों से संघर्ष कर रहे थे। हमारे इस संघर्ष को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कुल 22 परीक्षाओं को रद्द किया। यह छात्रों की बहुत बड़ी जीत है, इसके लिए उन्होंने आंदोलन में सहभागी सभी छात्रों को बधाई भी दी। इसके अलावा अन्य छात्र प्रतिनिधि पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि जिस दिन मुख्यमंत्री ने परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की, उसी मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और डॉ इरफान अंसारी ने हमारे मंच पर आकर कहा था कि मुख्यमंत्री ने कई मांगों को माना है, दो महीने का समय दें, जो भी गड़बड़ियां हैं, उसे ठीक कर लिया जाएगा। इसी को देखते हुए छात्रों ने दो महीने के लिए अपने आंदोलन को स्थगित किया है। अगर कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो दो महीने के बाद इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा करने की चेतावनी भी दी है।
पीजीटी परीक्षा भी रद्द करने की मांग
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता कुणाल प्रताप ने कहा कि सरकार ने 22 परीक्षाओं को रद्द किया है, पर पीजीटी यानी जिस परीक्षा से धांधली की शुरुआत हुई है, उसे भी रद्द किया जाना चाहिए। एक्साइज कांस्टेबल, फील्ड सुपरवाइजर सहित तमाम परीक्षाएं भी सरकार ने रद्द की हैं। माध्यमिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा, लैब असिस्टेंट परीक्षा में भी धांधली हुई है, उसे भी रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ नहीं लगी तो दो महीने बाद फिर से आंदोलन करेंगे।
मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ मुआवजे की मांग
रिफार्म मंच ने एक्साइज कांस्टेबल परीक्षा में जिनकी भी जान गई है, उनके परिवारजनों को एक-एक करोड़ के मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसकी नियुक्ति प्रक्रिया में पूरे राज्य में करीब 21 अभ्यर्थियों की जान गई।
सरकार को कोर्ट में भी रखनी होंगी हमारी हक की बातें
आंदोलनरत छात्रों ने कहा कि सरकार ने अगर हमारे हक में अनियमितता वाली परीक्षाओं को रद्द किया है तो अगर कोर्ट में मामला जाता है, तो वहां भी सरकार का स्टैंड हमारे फेवर में ही होना चाहिए, कोर्ट में हमारे तथ्यों को पेश किया जाना चाहिए। वहां यह नहीं लगना चाहिए कि सरकार हमारे हक में नहीं है। सरकार के कहने पर हमने फिर से सरकारी सिस्टम पर भरोसा जताया है, छात्रों को फिर से निराशा हाथ न लगे उन्हें यह ध्यान रखना होगा।
… तो नियुक्त कर्मियों को आंदोलन की जरूरत नहीं होती
छात्रों ने कहा कि जांच के सीआईडी की जांच पूरी होने के बाद अगर जेएसएससी-सीजीएल में नियुक्ति दी जाती तो उन्हें सरकार को हटाने की जरूरत भी नहीं होती। न ही नियुक्त लोगों को अब आंदोलन करना पड़ता। कुणाल ने कहा कि सात माह पहले तक वे भी हमारे आंदोलन का ही हिस्सा थे, बिना जांच के ज्वाइनिंग मिली यह सरकार की गलती है, हमारी नहीं।
नौकरी गंवाने वालों का प्रदर्शन शुरू
नौकरी गंवाने वाले पूर्व सहायक शाखा पदाधिकारियों ने बुधवार को परीक्षा रद्द करने और नियुक्तियां समाप्त करने के फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन में धरना दिया। प्रदर्शनकारी बंद गेट खोलकर सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गए और नियुक्तियां बहाल करने की मांग की। उनका आरोप था कि सरकार ने दबाव में एकतरफा फैसला लिया है। प्रशासन ने उन्हें निर्धारित स्थल कुटे में धरना देने को कहा, लेकिन वे पुराने विधानसभा भवन के पास प्रदर्शन की अनुमति मांगते रहे। देर शाम प्रदर्शनकारियों ने प्रोजेक्ट भवन से हटिया स्टेशन तक पैदल मार्च निकाला।
रद्द परीक्षाओं की अर्जी पर सुनवाई आज
जेपीएससी और जेएएससी की विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। इन पर गुरुवार को सुनवाई होगी। सोनम कुमारी, अवधेश कुमार एवं अन्य ने अलग-अलग अर्जी देकर परीक्षाएं रद्द करने के सरकारी आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया है। इन सभी का कहना है कि संबंधित परीक्षा रद्द होने से उनकी भर्ती पर संकट खड़ा हो गया है। इन याचिकाओं पर जल्द सुनवाई के लिए गुरुवार को हाईकोर्ट से विशेष आग्रह किया जा सकता है।



