मंत्री संजय निषाद ने दयाशंकर सिंह से कहा कि आप आरक्षण के मुद्दे पर समाज की आवाज सुन रहे हैं। हम आपसे कहना चाहेंगे कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से आरक्षण के मुद्दे पर जल्द बात करके इसे लागू करवाने की दिशा में ठोस पहल करें।
Lucknow News: राजधानी लखनऊ में निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के 11वें स्थापना दिवस पर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में हुए कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष और डा. संजय निषाद ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से आरक्षण के मसले पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बात करने को कहा। कार्यक्रम के दौरान 27 में संजय निषाद सीएम बा… गाना बजा। डा. निषाद मंच पर इस गाने पर झूमते दिखाई दिए।
संजय निषाद ने दयाशंकर सिंह से कहा कि आप आरक्षण के मुद्दे पर समाज की आवाज सुन रहे हैं। हम आपसे कहना चाहेंगे कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से आरक्षण के मुद्दे पर जल्द बात करके इसे लागू करवाने की दिशा में ठोस पहल करें। कहीं ऐसा न हो कि निर्णय लेने में देरी हो और इसका असर समाज के हितों पर पड़े। पार्टी के स्थापना दिवस के बहाने डा. निषाद ने शक्ति प्रदर्शन किया। अगले साल प्रस्तावित विधान सभा चुनाव के पहले कार्यकर्ताओं की इस जुटान और मंच से आरक्षण की बात कहकर डा. निषाद ने यूपी का सियासी पारा चढ़ा दिया है। संजय निषाद ने कहा कि पहले हम लोग सड़क पर थे और आज सदन में हैं। अपने लोगों की आवाज उठा रहे हैं। आ♪रक्षण के मुद्दे पर लोग यहां जुटे हैं और निषाद पार्टी आरक्षण के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि मैं मंत्री नहीं, संतरी हूं। असली मंत्री ये (कार्यकर्ता) हैं। हम इनकी आवाज और अधिकारों की बात सदन में उठाते हैं।
मछुआरा समाज को सत्ता में हिस्सेदारी का अधिकार चाहिए
संजय निषाद ने कहा कि जो लोग हमसे साढ़े सात साल का हिसाब मांगते हैं, उन्हें पहले 70 साल का हिसाब देना चाहिए। हमारे पिछड़े समाज के लोगों ने देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां जुटे लोग मुगलों को उखाड़ने और लोगों को सत्ता तक पहुंचाने वाले हैं। अब यही समाज खुद सत्ता तक पहुंचेगा। मछुआरा समाज को सत्ता में हिस्सेदारी का अधिकार चाहिए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 403 विधानसभा सीटों पर पार्टी को मजबूत करने पर चर्चा हुई। विशेष रूप से उन सीटों पर जोर दिया गया, जिस पर पार्टी की पकड़ कमजोर है। सूत्र बताते हैं कि जुटान के लिए पार्टी के जिला अध्यक्षों को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिन पदाधिकारियों ने जुटान में अहम योगदान दिया, उन्हें अगले चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।



