इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी की सात वर्षीय बच्ची की कस्टडी पिता सतेंद्र कुमार के पास बरकरार रखी। बच्ची ने कोर्ट में पिता के साथ रहने में सहजता जताई और मां के साथ जाने से इनकार किया। मां ने पति पर क्रूरता व दूसरी शादी के आरोप लगाए, जबकि पिता ने लिव-इन की बात स्वीकार की।

Allahabad High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी की सात वर्षीय एक बच्ची की कस्टडी उसके पिता सतेंद्र कुमार के पास बरकरार रखी है। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने बच्ची से सीधे बातचीत के बाद दिया। कोर्ट ने बच्ची से बात की तो उसने बताया कि वह कक्षा एक में पढ़ती है और अपने पिता के साथ रहने में सहज है। बच्ची ने अपनी मां अर्चना को पहचानने से इनकार कर दिया और स्पष्ट कहा कि वह उनके साथ नहीं रहना चाहती। पश्चिमशरीरा थाने की पुलिस ने कोर्ट के गत 30 जुलाई के आदेश के तहत बच्ची को अदालत में पेश किया था।
पत्नी ने पति पर लगाए क्रूरता के आरोप
उधर याची मां अर्चना ने कोर्ट को बताया कि पति ने उसके साथ क्रूरता की और उसे ससुराल से निकाल दिया। उसके बाद से वह अपने पिता-भाई के साथ रह रही है और सिलाई व सब्जी की दुकान से रोज़ाना करीब पांच सौ रुपये कमाती है। उसने आरोप लगाया कि पति ने दूसरी शादी कर ली है। पिता सतेंद्र कुमार ने आरोपों से इनकार करते हुए स्वीकार किया कि वह दूसरी महिला के साथ लिव-इन में रह रहा है, जिससे दो बच्चे भी हुए हैं। उसने बच्ची की अच्छी परवरिश और स्कूली पढ़ाई का दावा भी किया।
मां से बेटी वीडियो कॉल पर बात कर सकेगी
कोर्ट ने बच्ची की भावनात्मक स्थिति और उसकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए कहा कि अभी बच्ची को कस्टडी मां को सौंपना बच्ची के लिए मानसिक रूप से कष्टकारी हो सकता है। कोर्ट ने मां-बेटी के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने के लिए मां को बेटी से मुलाकात का अधिकार दिया है। वह रोज़ शाम छह से नौ बजे के बीच वीडियो कॉल पर बेटी से बात कर सकेगी और स्कूल की छुट्टियों में बच्ची को अस्थायी रूप से अपने पास रख सकेगी। साथ ही पिता को भी अपनी छोटी बेटी (जो फिलहाल मां के पास है) से मिलने का अधिकार दिया गया है। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।




