अपराध और गुंडागर्दी के जरिए करोड़ों की जमीनें बनाने वाले बिहार के दो भू माफिया गुड्डू यादव और संतोष डॉन पर शिकंजा और सख्त होने जा रहा है। ईओयू ने इनकी संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी कर ली है।
संगठित अपराध के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के निशाने पर आए दो बड़े जमीन माफिया गुड्डू यादव और संतोष डॉन की चिह्नित संपत्तियां जब्त होंगी। इन पर गुंडागर्दी कर करोड़ों की जमीन अर्जित करने का आरोप है। अपराध से अर्जित इन संपत्तियों की कुर्की जब्ती को लेकर बिहार पुलिस बीएनएसएस की धारा 107 के तहत कोर्ट में आवेदन करेगी। ईओयू ने पटना और नालंदा के संतोष कुमार उर्फ संतोष डॉन सहित गिरोह के 25 अन्य आरोपियों पर 13 जून 2026 को केस दर्ज किया था। वहीं, जमुई के सिकंदरा निवासी गुड्डू यादव उर्फ गुड्डू राय एवं 17 सहयोगियों के खिलाफ 28 जुलाई 2026 को प्राथमिकी दर्ज करते हुए छापेमारी की गई थी।
ईओयू की ओर से दर्ज एफआईआर के मुताबिक इन भू-माफिया गिरोहों पर गुंडागर्दी एवं आम जन में भय फैला कर फर्जीवाड़ा कर संपत्तियां अर्जित करने का आरोप है। संतोष डॉन पर पटना और नालंदा जिले के विभिन्न थानों में 31 केस दर्ज हैं। उसके गिरोह ने बीते 8 सालों में 75 से अधिक परिसंपत्तियों का निबंधन कराते हुए 13.30 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बनाई है।
गुड्डू यादव पर 3 जिलों में केस
वहीं, गुड्डू यादव के खिलाफ जमुई, नवादा और लखीसराय जिले के कई थानों में 39 केस दर्ज हैं। इनमें से 27 मामलों चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, जबकि 6 में कोर्ट ने संज्ञान भी लिया है। गुड्डू यादव ने खुद और अपनी पत्नी के नाम पर कुल 29 संपत्तियां निबंधित कराईं। उसके सहयोगियों के नाम पर भी 61 दस्तावेज मिले हैं।
विवाद में उलझा कर सस्ते दाम पर जमीन खरीदने का आरोप
ईओयू के मुताबिक, इन जमीन माफिया ने राजस्व कर्मचारी कार्यालय में अवैध मुंशी का काम करने वाले लोगों की मदद ली। फिर राजस्व रिकॉर्ड में हेर-फेर कराई। अपराध शैली के मुताबिक यह गिरोह आपराधिक षड्यंत्र कर फर्जी विक्रेता खड़ा कर उसे अपने या अपने किसी गुर्गे के नाम फर्जी निबंधन दस्तावेज तैयार कराता है। फिर जमीन के मालिक को विवाद में उलझा कर उनकी भूमि सस्ते दामों में खरीद लेता है।
जांच एजेंसी ने बताया कि जो जमीन मालिक अपना भूखंड बेचने को तैयार नहीं होते, उन्हें ये माफिया अपने गुर्गों से डरा-धमका कर आतंकित करते हैं। फिर उन्हें कोर्ट केस में उलझा दिया जाता है, ताकि लोग मजबूर होकर औने-पौने दाम पर जमीन बेच दें। इनके द्वारा सरकारी भूमि पर भी कब्जा किए जाने के कई प्रमाण मिले हैं।
सरकारी दर से कम पर कराया निबंधन
ईओयू के मुताबिक, आरोपियों ने दस्तावेजों के निबंधन में भी सरकारी राजस्व का चूना लगाया। गुड्डू यादव ने जमुई निबंधन कार्यालय में जिन 29 दस्तावेजों का निबंधन कराया, उनका सरकारी मूल्य करीब 7.50 करोड़ रुपये है। हालांकि, उसने अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए सरकारी मूल्य के करीब एक तिहाई मूल्य 2.60 लाख रुपये में ही निबंधन करा लिया। गुड्डू यादव के आपराधिक सहयोगियों और उनके परिजनों के नाम पर भी कम निबंधन मूल्य पर 6.65 करोड़ रुपये सरकारी मूल्य के 61 दस्तावेज हैं।



