UP News: यूपी के देवरिया निवासी लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित बुजुर्ग के समय पर समुचित इलाज नहीं मिला। अस्पतालों के चक्कर काटने में उनकी जिंदगी चली गई। परिवारीजनों का आरोप है कि देवरिया से लेकर लखनऊ तक 300 किमी कई अस्पतालों में वेंटिलेटर को लेकर भटकते रहे। इसमें मरीज का कीमती समय गुजर गया। बलरामपुर अस्पताल में मरीज को बड़ी मुश्किलों में आईसीयू में बेड मिला। इलाज के कुछ समय बाद ही मरीज की सांसें थम गईं।
देवरिया निवासी पारथ नाथ पांडेय (65) को सांस लेने में तकलीफ थी। पीलिया भी था। परिवारीजनों ने पहले उन्हें गोरखपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। तीन दिन तक भर्ती रहने के दौरान हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। हालत गंभीर होने पर परिवारीजन बुधवार को मरीज को लेकर लखनऊ पहुंचे। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। वहां करीब एक घंटे तक मरीज एंबुलेंस में तड़पता रहे। डॉक्टरों ने वेंटीलेटर खाली न होने की बात कहते हुए बलरामपुर अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इससे पहले परिवारीजन मरीज को लेकर अन्य अस्पताल भी गए थे। करीब 12:30 एडवांस लाइफ सपोर्ट की एंबुलेंस से मरीज बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा था। कुछ मिनट पहले पहले ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अस्पताल से निकले थे। जबकि प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ, एडी मंडल समेत अन्य डॉक्टर इमरजेंसी में मौजूद थे।
बेटा चंद्रप्रकाश पांडेय ने बताया इमरजेंसी में पर्चा बनाने से लेकर फाइल बनने तक करीब आधे घंटे का समय बीत गया। इस दौरान एंबुलेंस में मरीज की हालत और भी बिगड़ गई थी। इमरजेंसी के डॉक्टरों ने मरीज को सीधे एंबुलेंस से एसएसबी ब्लॉक के आईसीयू में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। परिवारीजन मरीज को एंबुलेंस से लेकर आईसीयू पहुंचे। मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कराया। वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती कर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। मरीज की हालत गंभीर थी। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली।



