
ब्यूरो रिपोर्ट।
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन काल माना जाता है। देशभर के ज्योतिर्लिंगों में लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। किंतु इस बार सावन में ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर, कठोर शिव साधक स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज वर्षों से भगवान शिव की कठिन तपस्या और साधना के लिए विख्यात हैं। उनके प्रवचन, रुद्राभिषेक, श्रावण अनुष्ठान तथा शिवभक्ति का संदेश देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रेरणा देता है। हाल के दिनों में उनके विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति भी देखने को मिली है।
सावन का महीना केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और शिवत्व को जीवन में उतारने का संदेश देता है। स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यही प्रेरणा देते हैं कि भगवान शिव की आराधना केवल मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन के प्रत्येक कर्म में सत्य, सेवा, करुणा और संयम का समावेश हो।
यही कारण है कि इस सावन में जहां एक ओर श्रद्धालु ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए जाएंगे, वहीं दूसरी ओर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज के दर्शन, आशीर्वाद और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचेंगे। उनके प्रति श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था इस बात का प्रमाण है कि आज भी कठोर तप, साधना और सनातन मूल्यों के प्रति समर्पित संत समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
लेखक शान्तनु शुक्ल।
धार्मिक विषयों के विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार।