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Linda Noskova Wimbledon champion: सेंटर कोर्ट पर खेले गए एक रोमांचक और उतार-चढ़ाव से भरे फाइनल मुकाबले में 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा ने हमवतन और करीबी दोस्त करोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही नोस्कोवा विंबलडन सिंगल्स का ताज पहनने वाली छठी चेक महिला बन गई हैं, जिससे उनका नाम टेनिस इतिहास के महान दिग्गजों की फेहरिस्त में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है.
लिंडा नोस्कोवा ने पहली बार जीता ग्रैंड स्लैम खिताब.
नई दिल्ली. लंदन के आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे. लेकिन सेंटर कोर्ट पर मौजूद दर्शकों की सांसें थमी हुई थीं. विंबलडन के इस ऐतिहासिक मैदान पर सिर्फ एक टेनिस मैच नहीं, बल्कि चेक टेनिस के एक नए सुनहरे अध्याय की पटकथा लिखी जा रही थी. दो सहेलियां, दो हमवतन और दो बेहतरीन खिलाड़ी लिंडा नोस्कोवा और करोलिना मुचोवा एक-दूसरे के सामने थीं. दांव पर था साल का सबसे प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम खिताब विम्बलडन. मैच के अंतिम क्षणों में तनाव हवा में साफ महसूस किया जा सकता था. मैच पॉइंट पर, जब करोलिना मुचोवा का एक बैकहैंड शॉट कोर्ट की सफेद रेखा से बाहर गया, तो सेंटर कोर्ट पर जैसे तालियों का तूफान आ गया. आखिरकार, 21 वर्षीय लिंडा नोस्कोवा ग्रैंड स्लैम चैंपियन बन चुकी थीं.
मैच की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, क्योंकि लिंडा नोस्कोवा (Linda Noskova) ने पहले सेट में पूरी तरह से दबदबा बना लिया. उनकी सर्विस और बेसलाइन शॉट्स में इतनी सटीकता थी कि मुचोवा को संभलने का मौका ही नहीं मिला. नोस्कोवा ने पहला सेट आसानी से 6-2 से अपने नाम कर लिया. ऐसा लग रहा था कि मैच बेहद एकतरफा होने वाला है. लेकिन करोलिना मुचोवा को टेनिस कोर्ट पर उनकी जुझारू क्षमता के लिए जाना जाता है। दूसरे सेट में मुचोवा ने अपने खेल का गियर बदला. उन्होंने कोर्ट के हर कोने का इस्तेमाल करते हुए नोस्कोवा को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया. दोनों के बीच एक-एक पॉइंट के लिए लंबी रैलियां हुईं. उतार-चढ़ाव से भरे इस सेट में मुचोवा ने अपने अनुभव का फायदा उठाया और 7-5 से दूसरा सेट जीतकर मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया.
लिंडा नोस्कोवा ने पहली बार जीता ग्रैंड स्लैम खिताब.
निर्णायक सेट में क्या हुआ
तीसरा और निर्णायक सेट किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं था. सेंटर कोर्ट पर मौजूद दर्शक हर शॉट के साथ अपनी सीटों से उछल रहे थे. यह सिर्फ शारीरिक क्षमता की नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की परीक्षा थी. ड्रामा अपने चरम पर था और मैच किसी भी तरफ झुक सकता था. ऐसी परिस्थिति में, 21 साल की युवा नोस्कोवा ने गजब का संयम दिखाया. उन्होंने अपनी गलतियों पर काबू पाया और मुचोवा की हर चुनौती का डटकर सामना किया. जब सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब नोस्कोवा ने अपने करियर का सबसे बेहतरीन टेनिस खेला और तीसरा सेट 6-3 से जीतकर इतिहास रच दिया. लिंडा नोस्कोवा ने करोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराया.
नेट पर खेल भावना की अनूठी मिसाल
जैसे ही आखिरी पॉइंट नोस्कोवा के पक्ष में गया, वह खुशी से कोर्ट पर ही बैठ गईं. लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के जश्न के बीच जो सबसे खूबसूरत तस्वीर उभर कर आई, वह थी दोनों खिलाड़ियों की खेल भावना. नोस्कोवा और मुचोवा सिर्फ एक ही देश की खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि वे आपस में बेहद करीबी दोस्त भी हैं. मैच खत्म होने के बाद दोनों नेट पर मिलीं और एक-दूसरे को गले लगा लिया. वह केवल एक औपचारिक हाथ मिलाना नहीं था, बल्कि उसमें दो सहेलियों का एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार साफ झलक रहा था. मुचोवा भले ही यह फाइनल हार गई थीं, लेकिन उन्होंने जिस तरह से मैच में वापसी की थी, उसने सबका दिल जीत लिया.
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ नाम
इस जीत के साथ ही लिंडा नोस्कोवा ने चेक टेनिस के उस समृद्ध इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया है, जिसने दुनिया को कई महान खिलाड़ी दिए हैं. वह विंबलडन का सिंगल्स खिताब जीतने वाली छठी चेक महिला बन गई हैं. अब उनका नाम टेनिस इतिहास के इन दिग्गज मार्टिना नवरातिलोवा, पेट्रा क्विटोवा, जाना नोवोत्ना, मार्केटा वोंद्रोउसोवा और बारबोरा क्रेजकिकोवा के साथ लिया जाएगा.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें


