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Divya Panwar Success Story: उदयपुर की जूडो खिलाड़ी दिव्या पंवार का चयन भारतीय टीम में हुआ है. वह 7 से 12 जून तक कजाकिस्तान के अल्माटी में होने वाले एशियन कैडेट जूडो कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. दिव्या एक सामान्य परिवार से आती हैं और उनके पिता निजी सफाई कर्मचारी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. इससे पहले भी वह जकार्ता में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी हैं. उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
उदयपुर. कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो आर्थिक परेशानियां और सीमित संसाधन भी सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकते. उदयपुर की रहने वाली जूडो खिलाड़ी दिव्या पंवार ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. एक सामान्य परिवार से आने वाली दिव्या का चयन अब भारतीय जूडो टीम में हुआ है. वह 7 से 12 जून तक कजाकिस्तान के अल्माटी शहर में आयोजित होने वाले एशियन कैडेट जूडो कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. उनके चयन से उदयपुर सहित पूरे राजस्थान में खुशी का माहौल है.
दिव्या की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि उनके पिता निजी सफाई कर्मचारी हैं. सीमित आय और साधारण जीवन के बावजूद परिवार ने बच्चों के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया. दिव्या ने बचपन से ही जूडो में रुचि दिखाई और लगातार मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई. आर्थिक चुनौतियां कई बार सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा.
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुकीं हैं दिव्या
जिला जूडो संघ के अध्यक्ष दिनेश धायाभाई ने बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से फॉरेन एक्सपोजर कार्यक्रम के तहत अल्माटी में 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया जाएगा. इस शिविर में दिव्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलेगी, जिससे वह प्रतियोगिता में और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगी. दिव्या के प्रशिक्षक सुशील सेन ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब दिव्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिला हो. इससे पहले भी वह इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं. इसके अलावा वह कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं और लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं.
दिव्या ने कहा- खेल ही उनकी असली पहचान
दिव्या के परिवार में खेल का माहौल भी खास है. तीन बहनों और एक भाई सहित सभी बच्चे जूडो खिलाड़ी हैं. परिवार ने हमेशा बच्चों को खेल के लिए प्रेरित किया. दिव्या ने हाल ही में सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में प्रथम वर्ष के लिए आवेदन किया है और पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी आगे बढ़ना चाहती हैं. दिव्या का कहना है कि खेल ही उनकी असली पहचान है और उनका सपना देश के लिए पदक जीतना है. उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें


