30 अप्रैल की शाम ने कई लोगों की दुनिया उजाड़ दी। बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे ने 9 लोगों की जान ले ली। दिल्ली के एक परिवार ने मां-बेटे को खो दिया। मां ने अपनी लाइफ जैकेट में बेटे को अपने सीने से कसकर जकड़ रखा था। आखिरी पलों में भी उन्होंने उसे नहीं छोड़ा। दोनों की लाशें उसी हालत में बरामद हुईं।
30 अप्रैल की शाम ने कई लोगों की दुनिया उजाड़ दी। जबलपुर के बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे ने 9 लोगों की जान ले ली। जो शाम सुकून भरी होनी चाहिए थी, वह दिल दहला देने वाली त्रासदी में बदल गई। दिल्ली के एक परिवार ने मां-बेटे को खो दिया। मां ने अपनी लाइफ जैकेट में बेटे को अपने सीने से कसकर पकड़ रखा था। आखिरी पलों में भी उन्होंने उसे नहीं छोड़ा।
9 शव बरामद, 28 लोग बचाए गए
30 अप्रैल की शाम जबलपुर के बरगी बांध पर सिर्फ एक क्रूज ही नहीं डूबा बल्कि उसके साथ ही कई लोगों की दुनिया भी डूब गईं। एक मां और उसका चार साल का बेटा मलबे से इस हालत में बाहर आए कि वे उस समय भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे। जब क्रूज नीचे डूब रहा था तब मरीना मैसी ने अपने छोटे बेटे त्रिशान को अपनी ही लाइफ जैकेट में लपेट लिया था और उसे अपने सीने से कसकर जकड़ रखा था। अपने आखिरी पलों में भी उन्होंने उसे नहीं छोड़ा। इस हादसे में अब तक नौ शव बरामद किए जा चुके हैं और 28 लोगों को बचा लिया गया है।
मरीना और त्रिशान की कहानी ने झकझोर दिया
इस भयानक त्रासदी के बीच मरीना और त्रिशान की कहानी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। दिल्ली में रहने वाला यह परिवार जबलपुर आया था। लेकिन नर्मदा का पानी उनकी कब्र बन गया। जैसे ही क्रूज पर अफरा-तफरी मची, यात्री चीखने लगे, खिड़कियां टूट गईं और निचले डेक पर पानी भर गया। जहां कई लोग जान बचाने के लिए बेतहाशा संघर्ष कर रहे थे, वहीं मरीना अपने बच्चे को बचाने में लगी थी। उनकी बेटी सिया और पति प्रदीप मैसी बच गए, लेकिन मरीना की उसके 4 साल के बेटे के साथ मौत हो गई।
हम बिल्कुल आराम से बैठे थे, तभी…
जबलपुर के अस्पताल के बाहर खड़ी सिया का दुख इतना गहरा था कि उसके पास रोने के लिए आंसू भी नहीं थे। सिया ने एनडीटीवी को बताया कि हम बिल्कुल आराम से बैठे थे, तभी अचानक हवा की रफ्तार तेज होने लगी। लोग क्रू से क्रूज बोट को किनारे लगाने की जिद करने लगे लेकिन उन्होंने हमारी बात सुनने से मना कर दिया।
खतरा साफ दिख रहा था
सिया के मुताबिक, खतरा साफ दिख रहा था और यात्री भी घबराए हुए थे, लेकिन उनकी चेतावनियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बजाय उन्होंने बोट को सीधे पानी के बीचों-बीच ले जाकर मोड़ दिया। चूंकि मेरी मां और भाई नीचे की तरफ थे, इसलिए वे फंस गए। मैं तो किसी तरह बाहर निकल पाई, लेकिन जब तक वे निकलने की कोशिश कर पाते, क्रूज पूरी तरह से पलट चुकी थी।
नानी को भी जुदा कर दिया
सिया ने बताया कि मेरे पिता और एक अन्य व्यक्ति ने केबिन के अंदर एक कैबिनेट जैसी चीज को तोड़कर लाइफ जैकेट निकाल ली थीं। उन्होंने इसे हम सबको बांट दिया। पूरी रात सिया उम्मीद लगाए रही कि उसकी मां और भाई किसी तरह बच गए होंगे। लेकिन सुबह में उनके शव एक साथ मिले। दोनों अब भी एक-दूसरे को गले लगाए हुए थे। मरीना ने अपने बेटे को इतनी जोर से अपनी छाती से चिपका रखा था कि बचाव दल को वे ठीक उसी हालत में मिले, जिस हालत में उन्होंने मौत का सामना किया था। सिया के लिए इस दुखद घटना ने न सिर्फ उसकी मां और भाई को छीन लिया, बल्कि उसकी नानी को भी उससे जुदा कर दिया।
छुट्टियां मनाने आया था परिवार
सिया ने बताया कि हम यहां अपने चाचा के नए घर में प्रवेश के मौके पर छुट्टियां मनाने आए थे। मेरे दादा-दादी भी बहुत समय बाद आए थे। अगले दिन हमने घूमने-फिरने का फैसला किया। उसने आगे कहा कि जैसे ही मैं मलबे से बाहर निकली, मुझे मेरे पिता दिखाई दिए। मैंने उनका हाथ कसकर पकड़ लिया। हम दोनों साथ मिलकर बाहर निकल आए, लेकिन मुझे मेरी मां और मेरा भाई कहीं भी दिखाई नहीं दिया।


