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Lata Mangeshkar Ke superhit Gane : स्वर कोकिला लता मंगेशकर और राज कपूर के बीच दो तीन बार टकराव हुआ. दो बार यह टकराव गानों को लेकर हुआ. राज कपूर जिस गाने को हर हाल में लता से रिकॉर्ड करवाना चाहते थे, लीजेंड सिंगर को वह सॉन्ग बिल्कुल ही पसंद नहीं था. लता को गाने के बोल पर आपत्ति थी. लता के तेवर देख राज कपूर ही हैरान रह गए. फिर उन्होंने भी ऊपरी तौर पर अपनी नाराजगी दिखाई. आखिर में लता मान गईं. वैसे तो लता दीदी इस तरह के गाने नहीं गाती थीं, फिर भी उन्होंने अपनी खूबसूरत सुरीली आवाज से गाने को सुपरहिट बना दिया. इस गाने का क्रेज पिछले 61 साल से बरकरार है. यह गाना कौन सा था, वो कालजयी फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…

साल था 1964. इस साल हिंदी सिनेमा की एक ऐसी मूवी रिलीज हुई जिसकी कहानी को आधार बनाकर बॉलीवुड में कई फिल्में बनाई गईं. पिछले 61 साल से इस फिल्म की कहानी, गीत-संगीत, डायलॉग का क्रेज बरकरार है. यह फिल्म ‘संगम’ थी जिसे राज कपूर ने बनाया था. यह एक रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा फिल्म थी जिसमें राज कपूर ने अभिनय के साथ-साथ डायरेक्शन भी किया था. राजेंदर कुमार और वैजयंती माला भी फिल्म में लीड रोल में थीं. फिल्म का म्यूजिक शंकर-जय किशन ने कंपोज किया था. म्यूजिक सदाबहार था. इसी फिल्म के एक गाने को लेकर लता मंगेशकर-राज कपूर में तकरार हुई थी.

शंकर-जयकिशन के म्यूजिक से सजी ‘संगम’ फिल्म में कुल 8 गाने थे. गीतकार शैलेंद्र और हसरत जयपुरी थे. फिल्म का हर गाना सुपरहिट था. इन सुपरहिट गानों में ‘बोल राधा बोल संगम होगा की नहीं’, ‘दोस्त दोस्त ना रहा’, ‘हर दिल जो प्यार करेगा’ ‘ओ मेरे सनम’, ‘ओ महबूबा’, ‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर’, ‘मैं क्या करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया’ सॉन्ग शामिल थे. फिल्म के हर गाने के बनने का किस्सा दिलचस्प है.

फिल्म के सभी गानों में फीमेल वर्शन में लता मंगेशकर की आवाज थी. जब ‘मैं क्या करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया’ गाने की बारी आई तो लता मंगेशकर ने इस गाने को रिकॉर्ड करने से इनकार कर दिया. लता दीदी अश्लील गानों को गाने से परहेज करती थीं. लता की नाराजगी देख राज कपूर साहब ने भी ऊपरी तौर पर नाराजगी दिखाई. राज कपूर ने लता से बातचीत बंद कर दी. इसे देख लता मान गईं. लता ने कहा था कि मैं गाना गा तो देती हूं लेकिन यह फिल्म कभी नहीं देखूंगी. लता इस बात इतनी नाराज हुई थीं कि उन्होंने आरके बैनर की दो फिल्मों में गाने नहीं गाए थे. ये फिल्में थीं : मेरा नाम जोकर और कल आज और कल. वैजयंतीमाला ने इस फिल्म में बहुत ही मॉडर्न वाली स्टाइल में कपड़े पहने थे.
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‘संगम’ फिल्म के बनने की कहानी भी दिलचस्प है. दरअसल, राज कपूर के आरके बैनर की पहली फिल्म 1948 में ‘आग’ आई थी. इसके स्टोरी-डायलॉग इंदर राज आनंद ने लिखे थे. उन्हीं दिनों राज कपूर और इंदर राज आनंद ने एक और स्टोरी ‘घरौंदा’ पर काम करना शुरू किया. यह एक लव ट्रायंगल स्टोरी थी. ‘घरौंदा’ के लिए उन्होंने दिलीप कुमार-नरगिस से बात की मगर दिलीप कुमार ने काम करने से इनकार कर दिया. फिर यह फिल्म शुरू ही नहीं हो पाई. राज कपूर अपने दूसरे प्रोजेक्ट में बिजी हो गए. 1949 में ‘बरसात’ और 1951 में ‘आवारा’ रिलीज होने के बाद राज कपूर का रुतबा और बढ़ गया. 1960 में ‘जिस देश में गंगा बहती है’फिल्म की कामयाबी के बाद राज कपूर के मन में ‘घरौंदा’ फिल्म बनाने का फिर से ख्याल आया.

1963 में राज कपूर ने इंदर राज आनंद से ‘घरौंदा’ की स्क्रिप्ट फाइनल तैयार करने को कहा. फिल्म का नाम बदलकर ‘संगम’ कर दिया गया. फिल्म की हीरोइन के लिए राज कपूर ने वैजयंतीमाला को पत्र लिखा था और पूछा था कि क्या वो ‘राधा’ बनेंगे. वैजयंतीमाला उस समय मद्रास में शूटिंग कर रही थीं. कई दिन तक जवाब नहीं आया तो राज कपूर ने फिर से टेलीग्राम भेजा और लिखा कि ‘बोल राधा बोल संगम होगा की नहीं’. फिर एक्ट्रेस का जवाब आया ‘होगा-होगा और जरूर होगा.’ राज कपूर ने इस सवाल-जवाब को गाने में बदलने का विचार बनाया. उन्होंने शैलेंद्र से गाना लिखवाया. फिल्म में यही गाना सबसे पहले पर्दे पर नजर आता है.

‘संगम’ भारत से बाहर शूट की जाने वाली पहली हिंदी फिल्म थी. लंदन-पेरिस और स्विटजरलैंड में फिल्म की शूटिंग हुई थी. यह उस समय भारत की पहली ऐसी फिल्म थी जिसकी लंबाई बहुत ज्यादा थी. ऐसे में फिल्म में दो इंटरवल रखे गए थे. फिल्म लंबी होने के बावजूद बहुत ज्यादा कामयाब हुई. हिंदी सिनेमा की खास फिल्म में शुमार है. कहानी, स्क्रीनप्ले, कॉस्ट्यूम, लोकेशन, क्लोअप और एक्टिंग सबकुछ असाधारण था. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था.

‘ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना’ गाने की भी दिलचस्प कहानी है. ऐसा कहा जाता है कि संगीतकार जयकिशन ने अपनी मंगेतर को चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी की पहली लाइन यही थी. राज कपूर के साथ चर्चा के दौरान यह बात सामने आई. बाकी गाना हसरत जयपुरी ने पूरा किया था. इस गाने को मोहम्मद रफी ने गाया था. गाना दिल्ली में फिल्माया गया था. पूरे तीन हफ्ते लोकेशन तलाशी. गाने के आखिरी हिस्से में लता मंगेशकर भी गाती हैं. इस गाने ने शंकर-जयकिशन के दिल में मनमुटाव पैदा कर दिया था.

फिल्म के प्रीमियर के दौरान फिल्म के राइटर आनंद राज आनंद ने राज कपूर को थप्पड़ जड़ दिया था. इससे उनके हाथ से 18 फिल्में निकल गई थीं. जब यह बात राज कपूर को पता चली तो उन्होंने इंदर राज आनंद से माफी मांगी. संगम के बजट की कोई सटीक जानकारी नहीं है. यह 1964 की टॉप फिल्म थी. फिल्म ने उस समय 8 करोड़ का कलेक्शन किया था. ओवरसीज मार्केट में भी फिल्म मे अच्छा काम किया था. फिल्म को 4 फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे.



