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Rishikesh Karnaprayag Rail Project: देवभूमि उत्तराखंड की पहाड़ियों को चीरकर निकलने वाली ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग’ रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है. भारतीय रेलवे का यह ड्रीम प्रोजेक्ट न केवल इंजीनियरिंग का एक बेमिसाल नमूना है, बल्कि यह उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों में आवाजाही की परिभाषा भी बदलने वाला है. करीब 37,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रही यह 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर्यटन और कनेक्टिविटी के नए द्वार खोलेगी. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि सफर का अधिकांश हिस्सा बादलों और पहाड़ों के बीच बनी अत्याधुनिक सुरंगों से होकर गुजरेगा, जो यात्रियों को एक रोमांचक और अद्भुत अनुभव प्रदान करेगा.

Rishikesh Karnaprayag Rail Project: मुरादाबाद रेल मंडल के अंतर्गत आने वाली ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग’ रेल लाइन का काम इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रहा है. करीब 37,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रही यह 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर्यटन और कनेक्टिविटी के नए द्वार खोलेगी. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि सफर का अधिकांश हिस्सा बादलों और पहाड़ों के बीच बनी अत्याधुनिक सुरंगों से होकर गुजरेगा, जो यात्रियों को एक रोमांचक और अद्भुत अनुभव प्रदान करेगा. इतना ही नहीं, भारत का यह प्रोजेक्ट चीन को भी टक्कर देगा.

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य उत्तराखंड के पांच प्रमुख जिलों देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली को रेल नेटवर्क से जोड़ना है. 125.20 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूती देगी. इतना ही नहीं, रेल मार्ग का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 105 किलोमीटर का ट्रैक लंबी और गहरी सुरंगों के भीतर बिछाया गया है. यह देश के सबसे ज्यादा सुरंगों वाले रेलवे प्रोजेक्ट्स में से एक है.

भारतीय रेलवे उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है. इस रेलवे ट्रैक की कुल लंबाई 125.20 किलोमीटर है, जिसमें से 105 किलोमीटर का हिस्सा सुरंगों के भीतर होगा. इसमें देश की सबसे लंबी रेलवे टनल भी शामिल होगी, जो इस दुर्गम सफर को महज 2 घंटे में पूरा कर देगी. वर्तमान में सड़क मार्ग से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक जाने में करीब 7 घंटे का समय लगता है. जाहिर है कि इस ट्रैक के निर्माण से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के समय व धन की बड़ी बचत होगी.
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मुरादाबाद मंडल के योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन से यह लाइन शुरू होकर कर्णप्रयाग तक जाएगी. मुरादाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने जानकारी दी कि 120 किलोमीटर से ज्यादा के इस नए ट्रैक पर 16 मेजर टनल (बड़ी सुरंगें) हैं, जिनका काम पूरा हो चुका है. अब ट्रैक बिछाने और अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का काम बहुत जल्द शुरू होने वाला है.

सीनियर डीसीएम ने बताया कि हम उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले 1 से 2 साल में यह प्रोजेक्ट पूरी तरह कंप्लीट होकर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा. यह एक विशाल प्रोजेक्ट है, जिसमें शामिल सभी 16 सुरंगों का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक से किया गया है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि निर्माण कार्य में सुरक्षा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुखद यात्रा का अनुभव मिल सके.

सुरक्षा के मोर्चे पर आदित्य गुप्ता ने कहा, ‘प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. सभी आधुनिक नियमों का पालन करते हुए काम किया जा रहा है ताकि यात्रियों को एक सुरक्षित और सुलभ सफर की सौगात मिल सके.’ बड़ी संख्या में पर्यटक अब दुर्गम पहाड़ियों तक आसानी से पहुंच सकेंगे. साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए देश के अन्य हिस्सों से जुड़ना आसान हो जाएगा, जिससे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

मुरादाबाद रेल मंडल के सीनियर डीसीएम का कहना है कि इसमे अन्य सभी चीजों के साथ ही साथ सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है. इसलिए जितनी भी सुरक्षा के नियम है. उनको फॉलो करते हुए यह काम किया जा रहा है. जिससे लोगों को इसकी सौगात मिल सके और लोग पहाड़ों और सुरंगों में भी ट्रेन के सफर का लुत्फ उठा सके।

125 किलोमीटर से अधिक का यह रेलवे ट्रैक तैयार होने के बाद न केवल पर्यटन को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचना बेहद सुलभ हो जाएगा. उत्तराखंड के इन पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों के लिए सुरंगों और पहाड़ों के बीच का यह सफर आकर्षण का केंद्र बनेगा, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी.



