अलीगढ़. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर फसलों पर भी दिख रहा है. फल और सब्जियों वाली नाजुक फसलें तेज धूप कारण जल्दी चपेट में आती हैं. इस मौसम में फसलों को सुरक्षित रखना और उनकी गुणवत्ता बनाए रखना, किसानों के लिए बड़ी चुनौती है. लोकल 18 से अलीगढ़ उद्यान विभाग के उप निदेशक बलजीत सिंह बताते हैं कि गर्मी में फसलों को बचाने के लिए सबसे जरूरी है सही सिंचाई और नमी का संतुलन. पानी की कमी होने पर पौधों में “विल्टिंग” यानी मुरझाने की समस्या देखने को मिलती है. कभी-कभी तेज तापमान के कारण कुछ समय के लिए पौधे मुरझा जाते हैं, जिसे टेम्परेरी विल्टिंग कहा जाता है और पानी देने पर पौधे फिर सामान्य हो जाते हैं. लेकिन यदि समय पर पानी न मिले और पौधा दोबारा ठीक न हो, तो यह परमानेंट विल्टिंग की स्थिति बन जाती है, जो फसल के लिए गंभीर खतरा है.
बलजीत सिंह कहते हैं कि गर्मी से बचाव के लिए मल्चिंग एक बेहद कारगर तरीका है. इसमें पॉलिथीन शीट या फसल अवशेष जैसे भूसा, पत्तियां आदि को जमीन पर बिछा दी जाती हैं, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है, जड़ों को सीधी गर्मी नहीं लगती. इससे खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं. सिंचाई की आधुनिक तकनीकें जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाने से पानी की बचत होती है और पौधों को जरूरत के अनुसार नमी मिलती रहती है.
ये तत्व जरूरी
बलजीत सिंह कहते हैं कि इन प्रणालियों के माध्यम से उर्वरक भी आसानी से दिया जा सकता है. फलदार फसलों में समय-समय पर पत्तियों और फलों की हल्की धुलाई करना भी फायदेमंद है. इससे पत्तियों की श्वसन क्रिया बेहतर होती है और धूल या अन्य कण हट जाते हैं, जिससे पौधे स्वस्थ रहते हैं. मैग्नीशियम, जिंक, बोरॉन और कोबाल्ट जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) का प्रयोग करने से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वे हीट वेव जैसे झटकों को बेहतर तरीके से सहन कर पाते हैं.
और क्या-क्या करें
बलजीत सिंह का कहना है कि सिंचाई हमेशा शाम के समय करना ज्यादा लाभकारी है, क्योंकि इस समय पानी का वाष्पीकरण कम होता है और पौधों को अधिक नमी मिलती है. दोपहर में सिंचाई करने से पानी जल्दी उड़ जाता है और उसका पूरा लाभ फसल को नहीं मिल पाता. खेत में अधिक कीचड़ न होने दें, बल्कि हल्की और संतुलित सिंचाई करें. जहां संभव हो, छायादार फसलों जैसे हल्दी या कुछ मसाले और सब्जियों को आंशिक छाया में उगाया जा सकता है. खेत के किनारों पर पेड़ लगाकर “विंड ब्रेक” तैयार किए जा सकते हैं, जो तेज गर्म हवाओं, लू के प्रभाव को कम करते हैं और मुख्य फसल की रक्षा करते हैं.
ज्यादा खाद खतरनाक
बलजीत सिंह बताते हैं कि गर्मी के मौसम में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग सीमित रखना चाहिए, क्योंकि इससे पौधों में पानी की मांग बढ़ जाती है. इसके स्थान पर बायोफर्टिलाइजर और बायोपेस्टिसाइड का प्रयोग करना अधिक सुरक्षित और लाभकारी होता है. इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है और पौधों की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है.



