
लोकेशन सोनभद्र रिपोर्ट संतोष मिश्रा।
सोनभद्र। जनपद में अवैध बालू खनन का खेल इस कदर बेलगाम हो चुका है कि अब यह सीधे तौर पर कानून, पर्यावरण और जनसुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। ताजा मामला में० रुद्रा माइनिंग एंड कम्पनी के खनन स्थल का है, जहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए हाईटेंशन बिजली लाइन टावर के नीचे खनन का कार्य किया जा रहा है।
यह स्थिति न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि बेहद गंभीर खतरनाक भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यहां कोई बड़ा हादसा या अनहोनी होता है, तो इसका असर सिर्फ सोनभद्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई राज्यों की बिजली व्यवस्था ठप हो सकती है। खनन स्थल पर पोकलेन मशीनों की गरज दिन-रात सुनाई दे रही है। भारी मशीनों से नदी का सीना चीरकर बालू निकाली जा रही है और सैकड़ों ट्रकों के जरिए धड़ल्ले से उसकी ढुलाई की जा रही है। नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बिगड़ रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार इस अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाई। मामला कई प्रतिष्ठित अखबारों और न्यूज चैनलों में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिससे जिला प्रशासन, खनन विभाग, वन विभाग और बिजली विभाग — सभी की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। हालात ऐसे हैं कि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन बिना अधिकारियों और प्रभावशाली मंत्री सफेदपोश नेताओं की मिलीभगत के संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि यह पूरा खेल संरक्षण में चल रहा है, तभी दिन-रात मशीनें चल रही हैं और किसी को कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा।

⚡ बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी
जब हाईटेंशन लाइन के नीचे खनन हो रहा है, तो क्या विभागों को इसकी जानकारी नहीं?
दिन-रात चल रही मशीनों की आवाज क्या प्रशासन तक नहीं पहुंच रही?
क्या बालू माफियाओं को सत्ता और सिस्टम का खुला संरक्षण मिला हुआ है?
या फिर अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?
सोनभद्र में जारी यह अवैध खनन सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक संभावित आपदा का संकेत है। अगर समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह किसी बड़े हादसे में बदल सकता है।
अब सवाल यही है — क्या प्रशासन जागेगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
