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गोंडा के रिटायर्ड क्लर्क सुरेंद्र पाल सिंह ने रिटायरमेंट के बाद खेती में नई शुरुआत की. उन्होंने अपने पैतृक खेत में उन्नत किस्म के ‘हरमन 99’ सेब लगाए और मैदानी इलाके में इसकी सफलता से मिसाल पेश की. सुरेंद्र की मेहनत और रिसर्च ने साबित किया कि सही तकनीक और लगन से खेती में नया आयाम हासिल किया जा सकता है.
गोंडा. जिले के विकासखंड झंझरी के ग्राम सभा केशवपुर पहाड़वा के रहने वाले सुरेंद्र पाल सिंह ने रिटायरमेंट के बाद एक नई शुरुआत कर लोगों के लिए मिसाल पेश की है. सुरेंद्र पहले जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे. नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने खाली बैठने के बजाय खेती में कुछ नया करने का फैसला किया और अपने खेत में सेब की बागवानी शुरू कर दी. लोकल 18 से बातचीत के दौरान सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि नौकरी के दौरान ही उन्हें खेती और बागवानी में रुचि थी. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इसके बारे में जानकारी जुटाई और आधुनिक तकनीक से सेब की खेती करने का निर्णय लिया. इसके लिए उन्होंने उन्नत किस्म के सेब के पौधे लगाए, जो कम तापमान वाले इलाकों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी उगाए जा सकते हैं. सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की उसके बाद हुआ जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे. सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने अपने पैतृक भूमि पर सेब की बागवानी करने का फैसला लिया और उन्होंने लगभग 8 से 9 बीघा में सब की खेती कर रहे हैं.
कौन से वैरायटी का है सेब
सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि सेब की वैरायटी हरमन 99 है यह वैरायटी गर्म जल आयु के लिए बनाया गया है. यह वैरायटी गोंडा के वातावरण में काफी अच्छे से सरवाइव कर रही है पिछले वर्ष हमने इसे फल भी लिया था. लगाने के एक से डेढ़ साल बाद फैलाना शुरू हो जाता है उन्होंने बताया कि इस बार दूसरी बार है कि हमारे सब के पौधे में फ्लोरिंग हो रही है और काफी अच्छी हो रही है. सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि हमने हिमाचल प्रदेश से हरमन 99 सेब का पौधा मांगे थे. उन्होंने बताया कि सेब का पौधा हिमाचल के हरिमन शर्मा द्वारा विकसित किया गया है. कम-शीत (low-chilling) किस्म है जो 45-50°C गर्म मैदानी इलाकों में भी फल देता है.
कहां से आया आइडिया
सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि सेब की बागवानी का खेती का आईडिया हमको ऐसा आया की मार्केट में सेब की डिमांड हमेशा बनी रहती है और यदि हम लीग से हटकर कुछ करेंगे तो उसकी डिमांड भी अच्छी रहेगी. फिर मैंने गोंडा में सेब की खेती की शुरुआत की, मैं सिर्फ खेती की शुरुआत के पहले काफी किसानों से मिला और काफी रिसर्च किया और यूट्यूब पर देखा उसके बाद हमने गोंडा में लगभग 8 से 9 बीघा में सेब की खेती कर रहे हैं. सुरेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि 8 से 9 बीघा में शुरुआत में सेब की बागवानी में लगभग एक से डेढ़ लाख रुपए का खर्चा आया है. उन्होंने बताया कि इसी में हमने सरसों लगाया था तो सरसों की अच्छी पैदावार हुई है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



