
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
जुगैल/सोनभद्र। बनवासी सेवा आश्रम शाखा जुगैल में तीन दिवसीय किशोर किशोरी सहजीवन शिविर का आयोजित हुआ सबसे पुरानी सस्था जो 1954 से लगातार सोनभद्र के 6 ब्लाको के 445 गांवों में काम करती है। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य,के साथ-साथ आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। किशोर किशोरियों साहजीवन शिविर में स्वालंबन, स्वरोजगार,क्षेत्र का इतिहास वर्तमान पर्यावरण स्थिति, पंचायती राज अपनी सरकार, महिला पुरुष सामान्य जैसे मुख्य विषयों पर राष्ट्रीय ध्वज बांधना और कब-कब फहराया जाता है। जैविक खेती के लिए कंम्पोस्ट खाद बनाना,स्वास्थ्य के लिए योगा सामुदायिक श्रमदान के माध्यम से बच्चों में जीवन कौशिक की विकास करना। मुख्य उद्देश्य है। वनवासी सेवा आश्रम जुगैल शाखा प्रबंधक चौबे जी ने किशोर किशोरी शिविर प्रशिक्षण चलाया जा रहा है जिसमें ग्राम जुगैल के 40 बच्चे जिसमें बालक बालिका, एक प्रशिक्षित टीम है जिसमें वनवासी सेवा आश्रम की तरफ से प्रशिक्षण दिया जा रहा है प्रशिक्षण में मुख्य भूमिका भविष्य में आदर्श नागरिक सहजीवन किशोरी बच्चों में नैतिकता का विकास हो पारिवारिक भूमिका हो जो आज लिंग भेद भाव बढ़ रहा है वह एक समानांतर दिशा में साथ ही साथ गांव घर की व्यवस्था एवं पंचायत राज में हमारे बच्चों की या आम नागरिकों की क्या भूमिका है इस उद्देश्य से यह शिविर चलाए जा रहा है। प्रेम दयाल निषाद ने ग्राम जुगैल के बच्चे जो अलग-अलग टोल से आए हुए हैं जिनकी इनकी संख्या जो है 44 है लड़के लड़कियां इसमें दोनों है तो आप जैसा कि मेरे बैनर में देख रहे हैं किशोर किशोरी सहजीवन शिविर लिखा हुआ है यह तीन दिवसीय कार्यक्रम है इसमें सारे लड़के लड़कियों में कोई भेदभाव ना रहते हुए सब लोग साथ में मिलजुल करके सारे एक्टिविटी को करते हैं। जिसमें सुबह 5:00 बजे जागरण होता है इसके बाद 6:00 बजे व्यायाम होता है फिर हमारा सामूहिक जो है श्रमदान होता है झंडा रोड का कार्यक्रम होता है उनको झंडा किस तरह से फहराया जाता है कैसे बाधा जाता है कब-कब फहराया जाता है इस तरह के एक्टिविटी है। फिर हमारे कई विषय है जिन बिंदुओं पर हम लोगों से चर्चा करते हैं जैसे मैं घर व्यवस्था हो गया महिला पुरुष समानता हो गया। हमारा पर्यावरण स्थिति जो यहां का क्षेत्र का इतिहास लोग नहीं जानते हैं जो सिंगरौली डूब था उसके इतिहास के बारे में बच्चों को नहीं पता है उसको हम लोग विस्तृत जानकारी में उनको बताते हैं कि पहले हमारा इस क्षेत्र के लोग कैसे जीवन जिया करते थे और वह सब इनका बताते हैं कहानी के रूप में ताकि उनको भी पता चले कि जो हमारे आने वाली पीढ़ी है इनको समझ में आज क्या जीते थे और आज का जीवन में क्या अंतर है।