
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
मोरन खदान में दिन-रात बड़ी बड़ी पोकलेन मशीन और नाव से बालू खुदाई का आरोप।
जुगैल सोनभद्र। ओबरा तहसील अंतर्गत मोरन खदान क्षेत्र के ग्राम भगवा में मे० रुद्रा माइनिंग एंड कंपनी द्वारा कथित रूप से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन किए जाने का गंभीर मामला सामने आरहा है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सोन नदी में दिन-रात भारी पोकलेन मशीनों से खुदाई कर नियमों की खुलेआम धज्जिया उड़ाते हुए अनदेखी की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह पूरा खनन कार्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट निर्देशों और पर्यावरणीय नियमों की सरेआम अवहेलना है। नदी की प्रतिबंधित सुरक्षित वन श्रेणी में आने के बावजूद नदी की धारा के भीतर पोकलेन मशीनों और बड़ी बड़ी नाव से खुदाई जारी है, जिससे सोन नदी का प्राकृतिक प्रवाह, जलीय जीव-जंतु और पूरे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन गंभीर खतरे में पड़ गया है। वही स्थानीय लोगों के अनुसार, रात दिन सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से कथित रूप से अवैध बालू का परिवहन किया जा रहा है। आरोप है कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है और संबंधित विभागों की चुप्पी से खनन माफिया के हौसले बुलंद हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर वायरल हो रहे वीडियो में नदी के भीतर चल रही खुदाई और भारी मशीनों की गतिविधियां साफ दिखाई दे रही हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अनियंत्रित खनन से नदी का तल तेजी से कटाव की चपेट में आ सकता है, जिससे भूजल स्तर, कृषि भूमि और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर दूरगामी दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए अवैध खनन पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम सहित गंभीर धाराओं में कठोर कार्रवाई, मशीनों और वाहनों की जब्ती तथा संबंधित लीज और लाइसेंस निरस्त करने की मांग की गई है। इसके अलावा, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर निष्पक्ष जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मामला केवल भगवा का नहीं, बल्कि पूरे सोनभद्र जिले के अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा हुआ है। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन और खनन विभाग इस गंभीर मामले में कब तक “सूचना का इंतजार” करता रहेगा और क्या जनता को अपनी नदी बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा। क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है और लोग प्रशासन से त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
