
ब्यूरो रिपोर्ट सोनभद्र।
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “मिशन शक्ति 5.0″ के अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सशक्त करने के उद्देश्य से जनपद सोनभद्र पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिनांक 30 सितंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के मार्गदर्शन में पुलिस लाइन चुर्क में एक विशेष सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अनिल कुमार एवं मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी क्षेत्राधिकारी डॉ. चारु द्विवेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से सशक्त बनाना था, जिससे वे किसी भी आपात स्थिति में अपने बचाव के लिए सक्षम हो सकें। प्रशिक्षण सत्र का संचालन Drishti Self Defence Martial Arts Academy, ओबरा के अनुभवी कोच Senshi Sanjay Sah द्वारा किया गया। प्रशिक्षण में जनपद के विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। छात्राओं को मार्शल आर्ट्स के विभिन्न तकनीकी पहलुओं, संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता, आत्मबल बढ़ाने की तकनीकें तथा व्यावहारिक परिस्थितियों में आत्मरक्षा के उपाय सिखाए गए। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने प्रशिक्षण सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा आत्मरक्षा के गुर सीखकर आत्मविश्वास से परिपूर्ण नजर आईं। अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की बालिकाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। आवश्यकता है उन्हें सशक्त, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की, ताकि वे हर परिस्थिति का डटकर सामना कर सकें। आत्मरक्षा प्रशिक्षण इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।”
क्षेत्राधिकारी डॉ. चारु द्विवेदी ने कहा कि:-
“मिशन शक्ति केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक सोच है, जो महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, आत्मसम्मान एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करता है। इस प्रकार के प्रशिक्षण उन्हें न सिर्फ आत्मरक्षा के गुर सिखाते हैं, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि करते हैं।”
जनपद पुलिस सोनभद्र द्वारा यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और मजबूत कदम सिद्ध हुई है। मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे महिलाओं एवं बालिकाओं को न केवल जागरूक किया जा सके, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वाभिमानी और स्वावलंबी भी बनाया जा सके।
