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भीलवाड़ा की दंगल गर्ल अश्विनी बिश्नोई ने 17 साल की उम्र में ही ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जो बड़ी-बड़ी खिलाड़ी सिर्फ सपना देखती हैं. साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली अश्विनी अब तक देश के लिए 14 गोल्ड सहित कई सिल्वर और कांस्य पदक जीत चुकी हैं. हाल ही में ग्रीस के एथेंस में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. वह राजस्थान की पहली महिला पहलवान बनीं, जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता.

अश्विनी ने एक महीने के अंदर तीन इंटरनेशनल गोल्ड जीतकर गोल्डन हैट्रिक भी बनाई. वियतनाम में आयोजित अंडर-17 सब जूनियर एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप और एशियाई बीच रेसलिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल की. वह सब जूनियर एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली राजस्थान की अकेली खिलाड़ी हैं.

अश्विनी का परिवार बेहद साधारण है. उनके पिता मुकेश बिश्नोई एक कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. कभी खुद राष्ट्रीय स्तर तक पहलवानी कर चुके मुकेश इंटरनेशनल नहीं खेल पाए, लेकिन उन्होंने अपना सपना बेटियों में पूरा करने का ठाना. उन्होंने दोनों बेटियों को बचपन से ही अखाड़े में उतार दिया और दिन-रात मेहनत करके बेटियों की ट्रेनिंग पर ध्यान दिया. अश्विनी की ट्रेनिंग भीलवाड़ा के मदन पहलवान के मार्गदर्शन में शुरू हुई.

अश्विनी की सफलता के पीछे उनका कठोर अभ्यास है. वह रोजाना 8 से 9 घंटे कुश्ती की प्रैक्टिस करती हैं. सुबह मैट पर, दोपहर में अखाड़े में और शाम को घर पर मेट ट्रेनिंग कर उन्होंने खुद को मजबूत बनाया. इसी कठिन अभ्यास का नतीजा है कि आज वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े टूर्नामेंट जीत चुकी हैं.

भीलवाड़ा शहर के जवाहर नगर की रहने वाली अश्विनी हाल ही में 12वीं कक्षा कला वर्ग में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुई हैं. परिवार में माता-पिता, एक भाई और एक बहन है. छोटी बहन भी पहलवानी करती है. अश्विनी 15 साल की उम्र में ही राजस्थान से इंटरनेशनल स्तर पर खेलने वाली पहली पहलवान बनी थीं.

उन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप, अंडर-17 राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप, सीनियर फेडरेशन कप, अंडर-20 राष्ट्रीय कुश्ती और खेलो इंडिया यूथ गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में मेडल जीते हैं. 2023 में अंडर-15 एशियन सब जूनियर कुश्ती में गोल्ड और 2024 में जॉर्डन में हुई अंडर-17 सब जूनियर एशियाई चैम्पियनशिप में भी गोल्ड हासिल किया.

अश्विनी बिश्नोई ने साबित कर दिया है कि कठिन हालात और साधारण पृष्ठभूमि सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती. अपनी मेहनत, संघर्ष और जुनून के दम पर उन्होंने भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है और आने वाले दिनों में कई और टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी.

अश्विनी रोजाना सुबह 5 से 8 बजे तक मैट पर अभ्यास करती हैं फिर 11 से 1 बजे तक अखाड़े पर अभ्यास करती हैं, फिर दिन में रेस्ट करती हैं फिर शाम 4 बजे से 8 बजे तक पिता की देखरेख में घर पर मेट ट्रेनिंग करती हैं. इसी तरह रोजाना की 8-9 घंटे की प्रेक्टिस ने उन्हें गोल्ड गर्ल बनना और वह अब अलग-अलग टूर्नामेंट में 14 गोल्ड मेडल जीत चुकी है.


