कोच राजेंद्र सिंह ने बताया कि माता-पिता को अलग-अलग दिशा में जाने की जरूरत नहीं है. तीनों भाई-बहन एक ही जगह और एक ही समय पर प्रैक्टिस करते हैं. यहां तीनों की डाइट भी एक ही है. तीनों साथ में खेलते हैं और पार्टनर बनकर भी खेलते हैं.
तीनों खिलाड़ियों के पिता सूरज ने बताया कि वे आरएसी की 10वीं बटालियन में काम करते हैं. हमारा परिवार शुरू से ही खेल से जुड़ा हुआ है. मैंने भी फुटबॉल खेला है. बच्चों का हमेशा स्पोर्ट्स के प्रति काफी जुड़ाव रहा है. बच्चों के मौसी के बेटे बॉक्सिंग करते हैं, उन्हें देखकर बच्चों ने भी बॉक्सिंग खेलना शुरू किया.
नेशनल लेवल पर भी धमाकेदार इंट्री
पिछले चार सालों से तीनों भाई-बहन जिला, राज्य स्तर पर मेडल ला रहे हैं. राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भी तीनों ने मेडल हासिल किया था. अब नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में मेडल जीता है. बड़ा भाई अंडर 19 में खेलता है और बाकी एक भाई और बहन अंडर 17 में खेलते हैं.
रोजाना 6 घंटे की प्रैक्टिस
देवेंद्र ने बताया कि हमारा परिवार पहले से ही स्पोर्ट्स से जुड़ा रहा है. बॉक्सिंग खेल सबसे अलग लगा और इसका मेरे से खास लगाव था. रोजाना सुबह और शाम को 5 से 6 घंटे अभ्यास करते हैं. अब तक मैंने ओपन जूनियर नेशनल में गोल्ड, स्कूली में भी गोल्ड, जिला स्तर पर भी गोल्ड मेडल जीते हैं.
अर्जुन ने बताया कि ओपन और स्कूली प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है. अब तक तीन गोल्ड और दो सिल्वर मेडल जीते हैं. करीब चार सालों से बॉक्सिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं. बॉक्सिंग खेल बहुत अच्छा लगता है और अब इंटरनेशनल लेवल पर मेडल हासिल करना है.


