
संवाददाता। विशाल गुप्ता।
वृंदावन के कलाकारों ने मीरा बाई के जीवन चरित्र का किया सजीव मंचन, श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति ने मोहा मन ।।
बीजपुर (सोनभद्र) भक्ति की शक्ति जब अटूट विश्वास के साथ जुड़ती है, तो बड़े से बड़ा विरोध भी उसके सामने टिक नहीं पाता। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति मीरा बाई की अनन्य भक्ति, अटूट आस्था और समर्पण की ऐसी ही प्रेरणादायी गाथा शुक्रवार की शाम बीजपुर बाजार में आयोजित कृष्ण लीला के दौरान जीवंत हो उठी। वृंदावन से पधारे कलाकारों ने मीरा बाई के जीवन चरित्र का भावपूर्ण एवं सजीव मंचन कर दर्शकों को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। लीला के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की अटूट श्रद्धा, उनके जीवन में आए संघर्षों और अंततः भक्ति के सामने विरोधियों के झुकने के प्रसंगों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कृष्ण लीला के मंचन में दिखाया गया कि मीरा बाई बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मानती थीं। उनके मन में गिरधर गोपाल के प्रति अगाध प्रेम और अटूट विश्वास था। विवाह के बाद भी उनकी कृष्ण भक्ति निरंतर बनी रही। पति भोजराज की मृत्यु के पश्चात मीरा बाई पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में लीन हो गईं। सांसारिक बंधनों और राजपरिवार की मर्यादाओं से ऊपर उठकर उन्होंने गिरधर गोपाल को ही अपना आराध्य, अपना सहारा और अपने जीवन का आधार माना।
विरोध और यातनाएं भी नहीं डिगा सकीं मीरा की आस्था
लीला के अगले प्रसंग में मीरा बाई की भक्ति के प्रति राजपरिवार के विरोध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंचन के माध्यम से दिखाया गया कि उनकी कृष्ण भक्ति से नाराज राणा परिवार के लोगों ने उन्हें रोकने और उनकी आस्था को कमजोर करने के अनेक प्रयास किए। लोकप्रचलित कथा के प्रसंगों के माध्यम से मीरा बाई को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से विमुख करने की कोशिशों और उन्हें नुकसान पहुंचाने के षड्यंत्रों को दर्शाया गया। हालांकि, मीरा बाई का विश्वास अडिग रहा। विपरीत परिस्थितियों, विरोध और तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने गिरधर गोपाल का साथ नहीं छोड़ा।
मंचन में यह भाव विशेष रूप से उभरा कि मीरा बाई के लिए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण ही जीवन का सबसे बड़ा सत्य था। उनकी भक्ति के सामने विरोध और अहंकार की दीवारें धीरे-धीरे कमजोर पड़ती दिखाई गईं। अंततः विरोध करने वालों को भी उनकी अटूट आस्था के आगे झुकना पड़ा।
भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दे गई लीला
मीरा बाई के जीवन पर आधारित इस लीला ने दर्शकों को केवल धार्मिक भावनाओं से ही नहीं जोड़ा, बल्कि भक्ति, धैर्य, विश्वास और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा भी दी। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति और प्रसंगों के भावपूर्ण चित्रण को दर्शकों ने सराहा।
इस दौरान कमेटी अध्यक्ष बृज किशोर गुप्ता, विनोद गर्ग, सीताराम शर्मा, प्रेमचंद्र गुप्ता, नागेंद्र सिंह और रविन्द्र गुप्ता, बग्गा सिंह सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी, वॉलंटियर तथा सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे।