दलित महिला से रेप में गवाही के लिए हाजिर न होने पर वाराणसी के भेलूपुर के तत्कालीन सीओ को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया गया है।कोर्ट ने उनका वेतन रोकने के लिए भी कहा है। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
UP News: यूपी के वाराणसी में दलित महिला से दुष्कर्म में गवाही के लिए हाजिर न होने पर भेलूपुर के तत्कालीन सीओ सत्येंद्र प्रसाद तिवारी को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया गया है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) सुधाकर राय की अदालत ने सोमवार को यह आदेश देते हुए उनका वेतन रोकने के लिए कहा। सत्येंद्र प्रसाद तिवारी वर्तमान में कौशांबी में सीओ सिराथू के पद पर तैनात हैं। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
साल 2018 में भेलूपुर की दलित महिला ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। तत्कालीन सीओ सत्येंद्र प्रसाद तिवारी मामले की विवेचना कर रहे थे। केस अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इस बीच, अदालत ने गवाही के लिए 13 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विवेचक को तलब किया था। तिरंगा यात्रा में व्यस्तता के कारण वह हाजिर नहीं हुए। कोर्ट ने 24 अगस्त को फिर बुलाया लेकिन इस बार भी वह गैर हाजिर रहे।
गवाही के लिए एक सितंबर की तारीख मुकर्रर की गई। विवेचक अदालत में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अख्तियार किया। कहा कि गवाही के लिए विवेचक जानबूझकर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार कर 10 सितंबर को पेश करने का आदेश दिया। चीफ ट्रेजरी ऑफिसर को अग्रिम आदेश तक उनका वेतन रोकने का निर्देश दिया।
गवाही को नहीं आ रहे विवेचक, गिरफ्तारी का आदेश
उधर, प्रयागराज में 2008 के बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर द्विवेदी की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए विवेचक (आईओ) के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए हैं। अदालत ने बिना कारण अनुपस्थित रहने पर विवेचक पर दो हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही उनके विरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट के अनुपालन के लिए गिरफ्तारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने थाना प्रभारी कीडगंज को निर्देशित किया है कि वह आवश्यक पुलिस बल के साथ वाराणसी जाकर विवेचक की गिरफ्तारी सुनिश्चित करें और उन्हें आगामी सुनवाई की तिथि 22 सितंबर 2026 को अदालत में पेश करें।
मामला थाना कीडगंज के अपराध से संबंधित है, जिसमें धर्मेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य आरोपितों पर अमित सिंह की हत्या करने का आरोप है। अदालत में यह मामला विचाराधीन है। यालय ने बताया कि 18 सितंबर 2019 को आरोप तय होने के बाद अभियोजन के छह गवाहों का परीक्षण कराया जा चुका है, लेकिन विवेचक राजकुमार शर्मा की गवाही न होने के कारण मुकदमे की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।



