अजीत भारती ने अपने खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली की एक अदालत में याचिका डाली है। उनकी ओर से क्या दी गई दलीलें? जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…
यूट्यूबर अजीत भारती ने अपने खिलाफ एससी/एसटी एक्ट यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट) के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका डाली है। इसमें अजीत भारती की ओर से पेश वकीलों ने अपनी दलीलों में कहा कि प्रकरण में एससी/एसटी एक्ट के तहत कोई अपराध बनता ही नहीं है। इस मामले में अजीत भारती को अदालत से एक राहत मिल गई।
भारती की दलील- एससी/एसटी एक्ट का अपराध बनता ही नहीं
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अजीत भारती की ओर से वकील जय अनंत देहाद्राई और प्रत्यूष प्रसन्ना पेश हुए और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत में दलील रखीं। दलीलों में कहा गया कि मामले के तथ्यों पर गौर करें तो अजीत भारती के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कोई अपराध बनता ही नहीं है।
नोटिस दिया ही नहीं
अजीत भारती की ओर से वकील जय अनंत देहाद्राई ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी नहीं किया है। धारा 35(3) के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में आरोपी को हाजिर होने के लिए नोटिस देना होता जहां तत्काल गिरफ्तारी की जरूरत नहीं होती है।
एक राहत, नोटिस को कोर्ट में रखे पुलिस
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस अजीत भारती को नोटिस जारी करती है तो उसको कोर्ट में रखा जाए। अदालत उक्त नोटिस का परीक्षण करेगी। अजीत भारती के लिए अदालत के इस आदेश को एक मामूली राहत के तौर पर देखा जा सकता है। अब पुलिस को नोटिस कोर्ट में रखना होगा जिस पर प्रथम दृष्टया अदालत भी गौर करेगी।
अदालत ने कहा- वह नोटिस का करेगी परीक्षण
अदालत ने कहा- यदि जांच अधिकारी यानी आईओ की ओर से भारती को नोटिस जारी किया जाता है तो उसकी एक प्रति इस न्यायालय के रिकॉर्ड पर रखी जाएगी ताकि अदालत आवेदन का निपटारा करने के लिए एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध के तत्वों के बारे में संतुष्टि की जांच कर सके और इस जमानत अर्जी पर फैसला ले सके।
आईओ भी तलब
इसके साथ ही अदालत ने अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किया और जांच अधिकारी (आईओ) को तलब किया। अदालत ने मामले को बहस के लिए 31 अगस्त की तारीख दी है।
भारती के खिलाफ दी गई थी शिकायत
बता दें कि आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने अजीत भारती के एक वीडियो पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें अजीत भारती पर जाति-आधारित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था। शिकायत में कहा गया था कि अजीत भारती ने चन्द्रशेखर आजाद ‘रावण’ और बीआर अंबेडकर से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। महिलाओं के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और धमकियां दीं।
किन धाराओं में केस?
इसके बाद अजीत भारती के खिलाफ 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में एससी/एसटी एक्ट, आईटी एक्ट की धारा 67 और बीएनएस की धारा 196(1)(सी) और 351(3) के तहत एक केस दर्ज किया गया था। इसके बाद अजीत भारती ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनको उनकी बहन के बारे में अपमानजनक टिप्पणी कर के उकसाया गया था।



