कलेक्टर से पहले एसडीएम, एसडीओपी, अपर कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत अन्य प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने छात्रों के पास पहुंचकर उन्हें वापस लौटने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने कलेक्टर से मिलकर बात करने का अपना इरादा नहीं बदला।
मध्य प्रदेश में बड़वानी जिले के एक सरकारी आवासीय विद्यालय के सैकड़ों छात्र, अपने शिक्षकों पर जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने और गलत व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को सड़कों पर उतर आए। इस दौरान लगभग 200 छात्र-छात्राएं करीब 25 किलोमीटर तक पैदल मार्च करते हुए जिला मुख्यालय की ओर बढ़े। इस दौरान कुछ देर के लिए वे आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरने पर भी बैठ गए, जिसके चलते वहां काफी लंबा जाम लग गया। जिसके बाद कलेक्टर वहां पहुंचीं और उन्होंने छात्र-छात्राओं से बात करते हुए आरोपों की जांच के लिए एक टीम का गठन करने की घोषणा की, तब जाकर विद्यार्थियों ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म किया।
यह विरोध-प्रदर्शन सेंधवा के पास जामली में स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने किया। इस आदिवासी बहुल जिले की अलग-अलग कक्षाओं खासकर 10वीं, 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि विद्यालय के शिक्षक उन्हें जातिसूचक शब्दों से संबोधित करते हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि छात्रावास में उन्हें परिजनों से मिलने नहीं दिया जाता और उनसे खराब व्यवहार करते हुए उनका अपमान किया जाता है।
प्रिंसिपल के साथ ही अधिकारियों ने समझाने-बुझाने की कोशिश
विद्यार्थियों के पैदल मार्च के दौरान विद्यालय के प्राचार्य के साथ ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी उन्हें विरोध प्रदर्शन खत्म करने के लिए लगातार समझाते रहे, लेकिन वे जिला मुख्यालय पहुंचकर डीएम से मिलने की मांग पर अड़े रहे। विद्यार्थियों के पैदल मार्च की खबर मिलते ही कलेक्टर जयती सिंह जुलवानिया उनसे मिलने के लिए निकल गईं और बड़वानी पहुंचे से पहले ही नाराज छात्र-छात्राओं से मुलाकात की। हालांकि तब तक विद्यार्थी करीब 25 किलोमीटर पैदल चल चुके थे।
छात्रा बोली- माता-पिता का सम्मान नहीं किया जाता
प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘हम एकलव्य जामली से हैं और हमने पहले भी जो मांगें उठाई थीं, उनमें से कोई भी पूरी नहीं हुई है। जो फीडबैक फॉर्म हमसे लिए गए थे, उन्हें भी हमारे सामने फाड़ दिया गया। हमारे माता-पिता का सम्मान नहीं किया जा रहा है। उनके सामने दरवाजे बंद किए जा रहे हैं।’
कलेक्टर बोलीं- बच्चों ने जातिसूचक शब्दों का आरोप लगाया
बच्चों से मिलने के बाद बड़वानी कलेक्टर जयती सिंह ने कहा कि ‘जामली के छात्रों को कुछ समस्याएं थीं, इसलिए हम उनसे मिलने आए। उन्होंने हमें अपने मुद्दों के बारे में बताया। मुख्य मुद्दा उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का है। इसके अलावा, उन्होंने कुछ अन्य छोटे मुद्दे उठाए हैं और हमने उनकी चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की।’
छात्रों ने कलेक्टर से मांगी खेल सुविधाएं
कलेक्टर ने कहा, ‘वे बेहतर खेल सुविधाएं चाहते हैं। यह जानकर अच्छा लगा कि हमारे बच्चे वॉलीबॉल और खो-खो खेल रहे हैं। कुछ अन्या छात्राएं डांस में भी शामिल हैं और वे चाहते हैं कि स्कूल में ऑडिटोरियम सभागार का निर्माण जल्द से जल्द पूरा हो।’ सिंह ने कहा कि आरोपों और अन्य शिकायतों की जांच के लिए एसडीएम और एसडीओपी की एक समिति गठित की गई है। एक बार पूरे मामले की जांच हो जाने के बाद, हम नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
60 किमी पैदल चलने के लिए निकले थे छात्र
बता दें कि जामली का यह एकलव्य आवासीय विद्यालय जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है। यहीं से छात्र-छात्राएं पैदल चलते हुए कलेक्टर मैडम से मिलने के लिए बड़वानी जा रहे थे। करीब 25 किलोमीटर चलने और कलेक्टर मैडम से मुलाकात होने के बाद लगभग 10 घंटे तक चला यह गतिरोध खत्म हो गया, इसके बाद प्रशासन ने छात्रों को बसों से वापस हॉस्टल भेज दिया।



