उत्तर प्रदेश में एक सितंबर से सर्किट रेट गणना की नई प्रणाली लागू होने जा रही है। प्रदेश के स्टांप, न्यायालय शुल्क और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा गया है।

उत्तर प्रदेश के स्टांप, न्यायालय शुल्क और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल (फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश में जमीनों के सर्किल रेट निर्धारण में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। अभी हर जिले में सर्किल रेट गणना अलग-अलग प्रणाली से होती है। नए प्रस्ताव में हर जिले में गणना प्रणाली एक समान हो जाएगी। स्टांप, न्यायालय शुल्क और पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने इस सम्बंध में प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट अनुमति के लिए भेजा है। इससे जमीन-मकान खरीदने वालों और बेचने वालों को सर्किल रेट की गणना में आसानी होगी। जिलों में अलग-अलग गणना प्रक्रिया से होने वाले झंझटों से निजात भी मिलेगी।
वर्तमान में कलेक्टर की ओर से हर जनपद में सर्किल रेट औऱ स्टाम्प शुल्क की गणना प्रक्रिया अलग-अलग होती है। इससे हर जिले में सर्किल रेट के निर्धारण औऱ स्टाम्प शुल्क की गणना भी अलग है। वाराणसी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज आदि प्रमुख शहरों की भौगोलिक और प्राकृतिक स्थिति अलग होने से वहां के रियल एस्टेट बाजार की कीमतें भी अलग-अलग हैं।
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मूल्य सर्किल रेट है। इससे कम कीमत पर संपत्ति बेची नहीं जा सकती। ये रेट स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की गणना में सहायक होते हैं, क्योंकि ये शुल्क संपत्ति के सर्किल रेट या बाजार मूल्य दोनों में से जो भी अधिक हो उस पर लगाए जाते हैं। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में सर्किल दर निर्धारण और स्टांप शुल्क की गणना के लिए एक समान प्रणाली हो। नए प्रावधान में शासन की ओर से कलेक्टर को एक मार्गदर्शिका उपलब्ध करा दी जाएगी, जिस पर गणना होती रहेगी।
तीन श्रेणियों में बंटेंगी संपत्तियां
वर्तमान में हर जिला सर्किल रेट तय करने के लिए अपने अलग-अलग पैमाने का पालन करता है, जिससे दो पड़ोसी जिलों में भी दरों का बड़ा अंतर देखने को मिलता है। नई व्यवस्था के तहत अब पूरे प्रदेश की संपत्तियों को मुख्य रूप से शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण जैसी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। हर श्रेणी में क्षेत्र के विकास की स्थिति, कनेक्टिविटी और महत्व के आधार पर ज्यादा से ज्यादा 25 अलग-अलग सर्किल रेट बनाए जाएंगे। इन वर्गीकरणों के तहत आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और कृषि भूमि के लिए अलग-अलग मानक दरें तय की जाएंगी।
मंत्री रवींद्र जायसवाल के अनुसार पूरे प्रदेश में एक सर्किल दर गणना प्रणाली के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे कई जिलों में गणना प्रणाली में व्याप्त विसंगतियां दूर होंगी। साथ ही क्रेता-विक्रेता आसानी से अपनी सम्पत्तियों का सर्किल रेट औऱ स्टाम्प शुल्क की गणना आसानी कर सकेंगे।



