इस कार्यक्रम के दौरान पूर्व नक्सली महिलाओं ने हथकरघा से बने कपड़े पहनकर हैंडलूम का प्रचार किया। वहीं इस मौके पर आयोजित ट्राइबल फैशन शो में इन महिलाओं ने पारंपरिक हाथ से बुने हुए कपड़े पहनकर आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक भी किया।
छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का खात्मा होने के बाद हाल ही में उस समय बदलाव की एक बड़ी तस्वीर नजर आई, जब एक समय में बस्तर के घने जंगलों में हथियार लेकर नक्सली के तौर पर घूमने वाली महिलाएं रायपुर में रैम्प वॉक करती नजर आईं। नक्सली कैंप से फैशन रैंप तक का उनका ये सफर ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में दिखाई दिया, जहां पर इन पूर्व महिला नक्सलियों ने रैंप वॉक कर सबका दिल जीत लिया और खूब तालियां भी बटोरीं। अपनी रैंप वॉक के जरिए उन्होंने सरेंडर करने और मुख्यधारा में लौटने के बाद आए बदलाव को दिखाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस फैशन शो का आयोजन 7 अगस्त शुक्रवार को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हुआ था, और इस कार्यक्रम के दौरान इन महिलाओं ने हैंडलूम से बनी ड्रेस पहनकर इन कपड़ों का प्रचार किया। वहीं इस मौके पर आयोजित ट्राइबल फैशन शो में इन पूर्व महिला नक्सलियों ने पारंपरिक हाथ से बुने हुए कपड़े पहनकर आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक भी किया।
इससे पहले शुक्रवार को ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने राज्य के बस्तर इलाके में विकास की गति तेज करने के लिए केंद्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में विशेष छूट देने की मांग की थी।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री साय ने बताया कि दशकों के विद्रोह के बाद बस्तर अब एक शांतिपूर्ण इलाका बन गया है, इसलिए इस इलाके को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने के लिए मजबूत सड़क कनेक्टिविटी की बहुत ज्यादा जरूरत है। सीएम साय ने जानकारी देते हुए कहा था, ‘आज, हमारे राज्य के डिप्टी सीएम विजय शर्मा के साथ, हमने केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की, बैठक में अधिकारी भी मौजूद थे। 40-50 साल बाद, हमारा बस्तर का इलाका आखिरकार नक्सल-मुक्त हो गया है, और वहां विकास की बहुत जरूरत है। इसलिए विकास के नजरिए से कनेक्टिविटी बहुत जरूरी है।’
इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि हालांकि छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) से काफी फायदा हुआ है, लेकिन बस्तर की खास आबादी संरचना के कारण केंद्रीय फंडिंग के सामान्य नियमों के तहत चुनौतियां आती हैं। क्योंकि इस इलाके में बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में आबादी का घनत्व कम है, इसलिए मौजूदा PMGSY नियमों के तहत आबादी की सख्त शर्तों की वजह से दूर-दराज की बस्तियों को जोड़ने वाली सड़कें बनाना मुश्किल हो जाता है।
साय ने कहा, ‘हालांकि हमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कई सड़कें मिली हैं, लेकिन उस इलाके में आबादी का घनत्व बहुत कम है, इसलिए हमने मंत्री से योजना के नियमों में कुछ छूट देने का अनुरोध करने के लिए मुलाकात की। उन्होंने हमारी बात ध्यान से सुनी और भरोसा दिलाया कि वे इस मामले में पहल करेंगे।’



