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Neeraj Chopra finishes fourth: आठ महीने बाद चोट से उबरकर मैदान पर उतरे भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा ने दोहा डायमंड लीग 2026 में चौथे स्थान के साथ वापसी की. पहला थ्रो फाउल होने के बाद, उन्होंने शानदार जज्बा दिखाते हुए तीसरे प्रयास में 85.69 मीटर का थ्रो फेंका. हालांकि वे मेडल और फाइनल शूटआउट से चूक गए, लेकिन उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए आसानी से क्वालीफाई कर लिया. प्रतियोगिता में श्रीलंका के रुमेश पाथिरागे 88.68 मीटर के थ्रो के साथ शीर्ष पर रहे.
नीरज चोपड़ा डायमंड लीग में चौथे नंबर पर रहे.
नई दिल्ली. चोट की मार, आठ महीने का लंबा इंतजार और फिर दुनिया के सबसे बड़े मंचों में से एक पर वापसी. भारतीय जैवलीन थ्रो के पोस्टर बॉय नीरज चोपड़ा के लिए दोहा डायमंड लीग 2026 केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उनके अदम्य साहस और जुझारूपन की एक नई कहानी थी. लगभग आठ महीने तक पीठ की चोट से जूझने के बाद, 28 वर्षीय पूर्व ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता ने एक बार फिर मैदान पर कदम रखा. हालांकि यह वापसी वैसी नहीं रही जैसी उनके करोड़ों प्रशंसक उम्मीद कर रहे थे, लेकिन खेल के प्रति उनका समर्पण और तकनीक आज भी उतनी ही लाजवाब दिखी. नीरज चोपड़ा प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रहे, लेकिन उन्होंने आगामी राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करके यह साबित कर दिया कि शेर भले ही कुछ समय के लिए शांत था, लेकिन वह शिकार करना भूला नहीं है.
दोहा के सुहानी शाम और खचाखच भरे स्टेडियम में जब नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने अपने हाथ में भाला थामा, तो पूरे देश की धड़कनें थमी हुई थीं. एक लंबे अंतराल के बाद मैदान पर उतरने का दबाव साफ दिख रहा था, जिसका असर उनके पहले प्रयास पर पड़ा. नीरज का पहला थ्रो फाउल रहा. किसी भी एथलीट के लिए चोट के बाद वापसी करते हुए पहली ही कोशिश में फाउल होना मानसिक रूप से परेशान कर सकता है. ऐसा लगा कि शायद शरीर के जंग को साफ होने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा. लेकिन नीरज चोपड़ा आम खिलाड़ियों से अलग मिट्टी के बने हैं. वे जानते हैं कि दबाव को कैसे अपनी ताकत बनाना है.
दूसरे प्रयास के बाद, खेल के तीसरे दौर में पूर्व विश्व नंबर 1 खिलाड़ी ने अपने चिर-परिचित अंदाज की झलक दिखाई. उन्होंने पूरी ताकत और सटीक कोण के साथ भाला हवा में लहराया, जिसने 85.69 मीटर की दूरी तय की. इस शानदार थ्रो के साथ ही नीरज ने अंक तालिका में लंबी छलांग लगाई और तीसरे स्थान पर पहुंच गए. स्टेडियम में मौजूद भारतीय प्रशंसक झूम उठे और ऐसा लगा कि नीरज अपने पुराने रंग में लौट आए हैं. चोट के बाद इस स्तर की दूरी हासिल करना यह दिखाता है कि उनकी मांसपेशियों की ताकत और तकनीक अभी भी कितनी मजबूत है.
नीरज चोपड़ा डायमंड लीग में चौथे नंबर पर रहे.
इसके बाद चौथे दौर में नीरज ने अपनी निरंतरता बनाए रखने की कोशिश की. उन्होंने 83.45 मीटर का एक और मजबूत थ्रो फेंका. हालांकि यह उन्हें और ऊपर ले जाने के लिए काफी नहीं था, लेकिन इसने उनकी लय को बनाए रखा. प्रतियोगिता के पांचवें दौर में समीकरण बदल चुके थे. शीर्ष तीन में बने रहने और अंतिम शूटआउट (फाइनल राउंड) के लिए क्वालीफाई करने के लिए नीरज को हर हाल में 86 मीटर से अधिक की दूरी नापनी थी. दबाव एक बार फिर बढ़ रहा था. नीरज ने अपनी पूरी जान झोंक दी, लेकिन बदकिस्मती से उनका यह प्रयास भी फाउल थ्रो में बदल गया. इस फाउल के साथ ही वह तीसरे स्थान से खिसककर चौथे स्थान पर आ गए और दोहा डायमंड लीग में उनका सफर यहीं समाप्त हो गया.
भले ही नीरज इस बार पोडियम पर जगह बनाने से चूक गए और यह वह परिणाम नहीं था जिसकी उन्होंने कल्पना की होगी, लेकिन इस प्रदर्शन के पीछे छिपे सकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा हासिल यह रहा कि नीरज चोपड़ा ने 2026 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए निर्धारित 82.61 मीटर के कड़े क्वालिफिकेशन मार्क को बेहद आसानी से पार कर लिया. एक एथलीट के लिए चोट के बाद अपनी पहली ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में बड़े टूर्नामेंट का टिकट पक्का करना एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जाता है.
अगर इस प्रतियोगिता केनतीजों पर नजर डालें, तो इस बार भाला फेंक की दुनिया में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का हैरतअंगेज थ्रो फेंककर तहलका मचाने वाले श्रीलंका के उभरते सितारे रुमेश थारंगा पाथिरागे ने दोहा में भी अपना दबदबा कायम रखा. श्रीलंकाई सनसनी ने 88.68 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया और यह दिखा दिया कि आने वाले समय में वे नीरज के लिए एक बड़ी चुनौती होने वाले हैं. वहीं, ग्रेनाडा के अनुभवी और पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स ने भी दमदार प्रदर्शन किया. पीटर्स ने 86.38 मीटर की दूरी तय कर दूसरा स्थान हासिल किया. अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन ने भी नीरज को कड़ी टक्कर दी और 85.99 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया, जिसने नीरज को चौथे स्थान पर धकेल दिया.
दोहा डायमंड लीग की यह कहानी नीरज चोपड़ा के लिए एक नई शुरुआत जैसी हैय आठ महीने तक ट्रैक से दूर रहने के बाद 85 मीटर से अधिक का थ्रो फेंकना यह दर्शाता है कि उनका ‘गोल्डन आर्म’ अभी भी पूरी तरह सुरक्षित है. यह प्रतियोगिता उनके लिए अपनी कमियों को परखने और शरीर की फिटनेस को आंकने का एक बेहतरीन जरिया साबित हुई है. राष्ट्रमंडल खेल 2026 अब ज्यादा दूर नहीं हैं, और नीरज के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में अपने खेल की धार को और तेज करेंगे. चौथे स्थान की यह निराशा निश्चित रूप से उनके भीतर एक नई आग फूंकेगी, और दुनिया बहुत जल्द ‘जैवलीन किंग’ को फिर से सोने पर निशाना लगाते हुए देखेगी.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें


