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Agri News: किसान जोगेंद्र सिंह ने बताया कि कमालगंज विकासखंड क्षेत्र के कंधरापुर निवासी किसान इस समय मचान विधि से तोरई उगाकर कमाई कर रहे है. खेतों में रोपाई करने के करीब एक माह बाद ही तोरई निकलने लगती है. आमतौर पर तोरई बाजार में महंगी बिकती है. जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है. दूसरी ओर यहां तैयार नर्सरी में रोग भी कम लगते है. जिससे लागत भी कम आती है.
फर्रुखाबाद: पारंपरिक खेती को छोड़कर किसान इन दिनों सब्जियों की खेती में जुटे है. अगर आप भी इस समय सब्जियों की अगैती फसले लगाना चाहते है तो यह जानकारी आपके लिए खास है. सब्जियों में तोरई एक नगदी फसल मानी जाती है और इसके पौधे लता बेल की तरह फैलते है. आमतौर पर यह फसल दो महीनों में तैयार हो जाती है. फर्रुखाबाद में किसानों ने सब्जियों की उन्नत किस्मों को तैयार किया है, जिससे बंपर पैदावार होती है.
लोकल18 को किसान जोगेंद्र सिंह ने बताया कि कमालगंज विकासखंड क्षेत्र के कंधरापुर निवासी किसान इस समय मचान विधि से तोरई उगाकर कमाई कर रहे है. खेतों में रोपाई करने के करीब एक माह बाद ही तोरई निकलने लगती है. आमतौर पर तोरई बाजार में महंगी बिकती है. जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है. दूसरी ओर यहां तैयार नर्सरी में रोग भी कम लगते है. जिससे लागत भी कम आती है.
तोरई के लिए जलवायु और तापमान: आज के मौसम में तोरई की खेती के लिए गर्म और आद्र जलवायु मुफीद है. इसकी खेती के लिए 25 से 37 डिग्री सेल्सियस तापमान सही माना जाता है. मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए.
तोरई की खेती कैसे होती है: इसकी खेती के लिए नमीदार जमीन में जुताई के बाद खेत को समतल करके 2.5 x 2 मीटर की दूरी पर 30 सेमी x 30 सेमी x 30 सेमी आकार के गड्ढे खोदकर तोरई के पौधे रोपने चाहिए. इसके बाद समय पर सिंचाई और गुड़ाई की जाती है. उन्नत किस्मों के पौधे लगाने के बाद कटाई के लिए एक माह का समय लगता है. तोरई की तुड़ाई कच्ची अवस्था में की जाती है, जिससे बाजार में 60 से 80 रुपए प्रति किलो के दाम मिलते है. इसका उपयोग सब्जी के रूप में होता है.
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