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अमेठी की होनहार छात्रा अस्मिता यादव ने अपनी रचनात्मकता और मेहनत से वेस्ट मटेरियल से हैदराबाद की ऐतिहासिक इमारत चारमीनार का शानदार मॉडल तैयार किया है. खास बात यह है कि यह मॉडल मात्र ₹100 की लागत में बना है और इसमें कागज का इस्तेमाल भी नहीं किया गया. किसान की बेटी अस्मिता इससे पहले किसानों के लिए पानी बचाने वाला यंत्र और दिव्यांगों के लिए सेंसर वाली ब्लाइंड स्टिक जैसे कई उपयोगी प्रोजेक्ट भी बना चुकी हैं, जिनकी मंडल स्तर पर सराहना हो चुकी है.
अमेठी. हुनर किसी संसाधनों का मोहताज नहीं होता, इसे सच कर दिखाया है अमेठी की होनहार छात्रा ने, कम उम्र की छात्रा अस्मिता यादव ने हुनर और मेहनत का सही इस्तेमाल किया है. छात्रा ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए बेकार समझे जाने वाले ‘वेस्ट मटेरियल’ से हैदराबाद की सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारत चारमीनार का शानदार मॉडल तैयार किया है. खास बात यह है कि छात्रा द्वारा कम लागत में तैयार किए गए, इस प्रोजेक्ट में रत्ती भर भी कागज का इस्तेमाल नहीं किया गया. इसके साथ ही छात्र का सफर यहां ही नहीं खत्म हुआ बल्कि छात्र ने दिव्यांगों के लिए ब्लाइंड जिला किसानों के लिए पानी बचाने वाला सिंचाई यंत्र सहित अन्य कई प्रोजेक्ट अपने प्रोजेक्ट में शामिल किया है, जिसकी मंडल स्तर पर वाह वाही हो चुकी है.
आपको बता दें, प्रोजेक्ट बनाने वाली जिस हुनरमंद छात्र अस्मिता की हम बात कर रहे हैं. वह अमेठी जिले के गौरीगंज जिला मुख्यालय की रहने वाली है और एक निजी स्कूलों की छात्रा हैं. छात्रा अस्मिता यादव के पिता किसान है और छात्र अस्मिता आरटीई यानी राइट टू एजुकेशन के तहत पढ़ाई कर रही है. छात्रा अस्मिता ने सबसे पहले अपने सफ़र की शुरुआत कक्षा 5 से की, कक्षा 5 में उन्होंने किसानों के लिए पानी बचाने वाले यंत्र को तैयार किया. इसके साथ ही दिव्यांग लोगों के लिए उन्होंने ब्लाइंड स्टिक तैयार की, जो सेंसर वाली स्टिक है जिसे उन्होंने ₹1500 में तैयार किया. इसके बाद छात्रा ने राम मंदिर का मॉडल तैयार किया. अब छात्रा ने इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में अपनी मेहनत खर्च की है. आपको बता दें कि, जिस इमारत पर करोड़ों रुपए खर्च हुए हो उसे छात्रा ने अपने हुनर से मात्र 100 में तैयार करे.
इतिहास को भी किया जीवंत
अक्सर विद्यार्थीयों से और परीक्षा में सवाल भी पूछे जाते हैं, जिसमें इतिहास से जुड़े सवाल होते हैं. ऐसे में छात्र ने इस प्रोजेक्ट के जरिए इतिहास को भी जीवंत किया छात्रा ने बताया कि इस ऐतिहासिक धरोहर को 1591 में कुतुब शाही वंश के पांचवें शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा निर्मित असली चारमीनार को बनाने में उस दौर में जहां बड़ी धनराशि लगी थी. उसी इतिहास को जीवंत करने के लिए छात्रा ने इसे फिर से मॉडल रूप में तैयार किया है उन्होंने कहा कि 184 फीट ऊंची इस ऐतिहासिक धरोहर के मॉडल को बनाने में उन्हें और उनकी सहेली को करीब 5 दिन का समय लगा.
मेहनत संघर्ष के साथ ऐतिहासिक भी है धरोहर
छात्रा ने इसे मेहनत और संघर्षों से तैयार किया, छात्रा अस्मिता यादव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया की चारमीनार का निर्माण 1589 में शुरू हुआ था और 1591 में यह पूर्ण हुआ. उसने कहा कि यह इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि जिस समय इसे तैयार किया गया उस समय फैली ‘हैजा’ जैसी भीषण महामारी के खात्मे की खुशी और प्रतीक के रूप में बनवाया गया था. फिलहाल छात्र के इस प्रोजेक्ट को अब हिस्ट्री डिपार्टमेंट ने खूब सराहा है और उसे इंस्पायर अवार्ड भी मिला है. इसके साथ ही छात्र अब तक मंडल स्तर पर चार से पांच प्रोजेक्ट का पुरस्कार पा चुकी है.
शिक्षकों का मिला साथ बेहतर और भी करेंगे काम
इस सफलता के पीछे अस्मिता ने अपनी सहेलियों और शिक्षकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया उन्होंने कहा इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में हमारी प्रोजेक्ट डायरेक्टर मैम आराध्या और स्कूल के शिक्षकों ने बहुत मार्गदर्शन दिया. साथ ही मेरी सहेलियों आराधना, पूजा और अन्य साथियों ने भी हाथ बंटाया, जिससे यह मुमकिन हो पाया. उन्होंने कहा कि आगे भी हम ऐसे प्रोजेक्ट बनाएंगे जो सीधे समाज के लोगों को फायदा दें.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



