लखनऊ. राजनीति में कभी-कभी ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जो सालों तक लोगों के जेहन से नहीं जातीं. लोग चले जाते हैं, नेता चले जाते हैं, सरकार बदल जाती है, लेकिन वो घटनाएं यादों और किस्से-कहानियों में किंवदंती बन जाती हैं. ऐसी ही एक घटना 2 जून 1995 को हुई, जिसे लखनऊ गेस्ट हाउस कांड के नाम से जाना जाता है. इस कांड की चर्चा आज भी लोग चौक-चौराहों से लेकर ड्राइंगरूम और बेडरूम तक करते हैं. इस घटना का जब भी जिक्र होता है तो मायावती, कांशीराम, मुलायम सिंह यादव के साथ एक पूर्व आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह का भी नाम आता है. हाल के दिनों में ओपी सिंह एक बार फिर से सुर्खियों में हैं, अपनी किताब ‘क्राइम, ग्राइम एंड गंपशन’ में इस कांड को लेकर कई खुलासे किए हैं. आइए जानते हैं कि मायावती के साथ उस दिन क्या घटनाएं घटीं? क्या कपड़े फाड़ने या जिंदा जलाने की बात सही है?
बिहार के गया जिले से निकलकर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के पद तक पहुंचने वाले ओपी सिंह का सफर जितना गौरवमयी रहा, उतना ही विवादों और संघर्षों से भरा भी रहा. ओपी सिंह उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के उन गिने-चुने अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें किसी राज्य की राजधानी का एसएसपी बनने का मौका एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार मिला. ओपी सिंह लखनऊ के 1994 से लेकर 1998 तक तीन बार एसएसपी बने. संयोग की बात है कि यूपी के पूर्व सीएम और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ हुआ गेस्ट हाउस कांड भी ओपी सिंह के एसएसपी रहते ही हुआ. ओपी सिंह जिस जिन दूसरी बार लखनऊ एसएसपी का चार्ज लिया, उसी दिन मायावती के साथ यह घटना घटी. ओपी सिंह ने अपनी किताब ‘क्राइम, ग्राइम एंड गट्स’ में लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कई खुलासे किए हैं, जो उस समय से अखबारों के कटिंग पेपर से बिल्कुल अलग हैं.
कौन हैं ओपी सिंह?
यूपी की पूर्व सीएम और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने 1 जून की शाम मुलायम सिंह यादव सरकार से समर्थन वापस ले लिया. उसी रात को ओपी सिंह लखनऊ के एसएसपी बनाए जाते हैं. लखनऊ एसएसपी बनने से पहले वह प्रयागराज कुंभ मेला क्षेत्र के एसएसपी पद पर तैनात थे. अगले दिन 2 जून को ओपी सिंह चार्ज लेते हैं. लेकिन कुछ ही घंटों में बसपा प्रमुख मायावती पर गेस्ट हाउस में हमला होने की खबर आती है. बकौल ओपी सिंह, ‘जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन और उस समय मैं लखनऊ के डीएम से मुलाकात कर रहा था. डीएम के साथ मीटिंग के दौरान ही लखनऊ गेस्ट हाउस कांड की मुझे जानकारी मिली. इसके बाद मैं और डीएम गेस्ट हाउस पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया.
मायावती के साथ गेस्ट हाउस में क्या हुआ था?
ओपी सिंह कहते हैं, ‘मैं डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के साथ मुलाकात कर रहा था. उसी समय हमें यह सूचना मिली कि स्टेट गेस्ट हाउस में बीएसपी और एसपी समर्थकों में झड़प हुई है. हम और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट एक साथ स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे. वहां हमने भीड़ को नियंत्रित किया. लाठी चार्ज किया. एक विधायक को जबरन किडनैप किया जा रहा था, उसे छुड़वाया गया. उसके बाद हम रात भर वहीं स्टेट गेस्ट हाउस में रहे. वहां मेरे पोस्टिंग को लेकर बात उठी कि मुझे ट्रांसफर से हटाया गया था तो फिर मुलायम सिंह यादव ने दोबारा लखनऊ क्यों लाया? पॉलिटिकल मोटिव को लेकर बीएसपी समर्थक और खुद मायावती चर्चा कर रही थीं. इसी को मद्देनजर रखते हुए बसपा नेताओं और खासकर मायावती ने कहना शुरू किया कि मुझे किसी प्रयोजन से वहां बुलाया गया है.’
2 जून 1995 को लखनऊ गेस्ट हाउस में मयावती के साथ क्या हुआ था?
ओपी सिंह ने किताब में क्या-क्या खुलासे किए?
ओपी सिंह अपने किताब में आगे कहते हैं, ‘मैं एसएसपी के रूप में डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट के साथ जब गेस्ट हाउस पहुंचा तो मायावती सुरक्षित थीं. वो अपने कमरे में थीं. उनका कमरा बंद था. कोई ऐसी घटना नहीं हुई. मार डालने और जला देने की शिकायतें और अफवाहें उड़ीं, जो सही नहीं था. हुआ यह था कि रात करीब 10:00 बजे डिवीजनल कमिश्नर और आईजी जोन वहां विजिट करने आए और हम सभी वहीं बैठे थे. डिवीजनल कमिश्नर ने मायावती से इंटरकॉम पर पूछा कि आप कुछ लेंगी? मायावती चाय पीने की इच्छा व्यक्त की. स्टेट गेस्ट हाउस का स्टेट मैनेजर बुलाया गया और डिवीजनल कमिश्नर ने कहा कि चाय की व्यवस्था कीजिए. उसने कहा कि मेरे पास गैस सिलेंडर नहीं है. फिर कहा गया कि अगल-बगल कहीं से भी गैस सिलेंडर ले आइए.’
क्या मायावती को जलाने की कोशिश की गई?
ओपी सिंह की किताब में आगे लिखा गया है, ‘जब गैस सिलेंडर लाया गया तो कर्मचारी ने उसे स्टेट गेस्ट हाउस के कैंपस में लुढ़काकर ला रहा था. सीमेंटेड फर्श पर लुढ़काने से आवाज आई जिससे लोग समझने लगे कि गैस सिलेंडर इसलिए लाया गया है कि उसे ब्लास्ट किया जाएगा. जिसका कोई मतलब नहीं था. लेकिन अफवाहों का बाजार गर्म था क्योंकि एक राजनीतिक द्वंद्व चल रहा था एसपी और बसपा के बीच. इसलिए इस तरह बातों को खूब बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया.’
मायावती के साथ बदसलूकी भी हुई थी?
ओपी सिंह कहते हैं, ‘हमारे रहते मायावती के साथ किसी भी तरह की अभद्रता नहीं हुई और न ही उसके पहले भी हमें कोई ऐसी जानकारी मिली. स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती के साथ किसी भी प्रकार की बदसलूकी की कोई घटना नहीं हुई. मैं और डिस्ट्रिक्ट मिजिस्ट्रेट वहां मौजूद थे और ऐसी कोई घटना नहीं हुई.’
क्या सच में फटे थे कपड़े और जलाने की थी कोशिश?
क्या सुरक्षा नहीं दी गई?
मायावती गेस्ट हाउस कांड को लेकर ओपी सिंह पर आरोप लगा कि पुलिस ने मायावती को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी. नतीजा यह हुआ कि मायावती के मुख्यमंत्री बनते ही ओपी सिंह को सस्पेंड कर दिए गए. यह उनके करियर का सबसे कठिन समय था. उन्हें लंबे समय तक वेटिंग में रहना पड़ा और कानूनी लड़ाइयां लड़नी पड़ीं. बाद में कल्याण सिंह ने मुकदमा वापस लिया. कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए तीसरी बार लखनऊ के एसएसपी बने.
ओपी सिंह केवल यूपी तक ही सीमित नहीं रहे. उन्होंने केंद्र में भी महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वे एनडीआरएफ के महानिदेशक रहे, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन को नई दिशा दी. इसके बाद उन्होंने सीआईएसएफ के डीजी के रूप में देश के हवाई अड्डों और औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा का जिम्मा संभाला. 2018 में जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो ओपी सिंह को वापस यूपी बुलाया गया और उन्हें प्रदेश का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया. डीजीपी के रूप में उनके दो साल के कार्यकाल में कुंभ मेला 2019 का सफल आयोजन और अयोध्या फैसले के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी बड़ी जीत मानी गई. 31 जनवरी 2020 को ओपी सिंह यूपी पुलिस की सेवा से रिटायर हुए. अपने पूरे सफर में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे.



