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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व प्रोफेसर डॉक्टर आई.के कुशवाहा ने लोकल 18 से बताया कि इस समय किसानों को बड़ी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. बारिश और बाढ़ के कारण उनकी भूमि लगातार कट रही है. जमीन से पोषक तत्व नि…और पढ़ें
जिसके बाद फसल लगाने के लिए काफी समय की आवश्यकता पड़ेगी मिट्टी की नमी को कम करने के लिए किसान जिप्सम का इस्तेमाल करें जो की मिट्टी की नमी को कम करता है. मिट्टी को भूभागूरी करने में मदद करता है. साथ ही बीज की बुवाई से पहले उसमें फफूंदी नाशक दवाइयों से बीज का शोधन अवश्य कर ले. जिससे बीज का फुटाव अच्छा हो और फसल फफूंदी से प्रभावित न हो.
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व प्रोफेसर डॉक्टर आई.के कुशवाहा ने लोकल 18 से बताया कि इस समय किसानों को बड़ी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. बारिश और बाढ़ के कारण उनकी भूमि लगातार कट रही है. जमीन से पोषक तत्व निकालकर बह रहे हैं. इस वर्ष की अगर बात करें तो इस वर्ष बे-मौसम बरसात हो रही है बांध से पानी छोड़ा जा रहा है. उस पानी के कारण खेतों का कटाव हो रहा है. खेतों में जलभराव होने के कारण खेतों में पानी खड़ा है. जमीन में नहीं जा पा रहा तो इसका कारण जमीन में हार्ड लेयर बनी हुई है.उस हार्ड लेयर को तोड़ने के लिए किसान अपने खेतों की गहरी जुताई करें. और जुताई करते समय सड़ी गोबर की खाद का अधिक मात्रा में इस्तेमाल करें. अगर खेत में पानी सूखने के बाद किसान नई फसल लगाने की सोच रहे हैं तो गीली मिट्टी में जुताई करेंगे तो मिट्टी की संरचना खराब हो जाती है.
जिप्सम पानी को अवशोषित करता
जिससे कोई भी फसल सही समय पर नहीं लग पाती. ऐसे खेतों में 50 किलो से लेकर 100 किलो ग्राम तक प्रति बीघा के हिसाब से जिप्सम का अधिक मात्रा में प्रयोग करें. जिप्सम पानी को अवशोषित करता है, मिट्टी को भुरभुरी करता है. जब खेत पूरे तरीके से तैयार हो जाए तो डोल और बेड बनकर ही उसमें बुआई करें. इसके साथ-साथ अपने खेत में बीज की बुआई करते समय फफूंदी नसी दवाई का बीज सोधन के लिए इस्तेमाल करे जैसे कार्बेंडाजिम मैनकोज़ेब 3 ग्राम प्रति किलोग्राम के हिसाब से बीज शोध में इस्तेमाल करें या टेबुकोनाजोल 1 ग्राम प्रति किलोग्राम के हिसाब से बीज में प्रयोग करें. बीज में फफूंदी नाशक इस्तेमाल करने से अगर खेत में कहीं पर फफूंदी लगी है तो वह बीज को खराब होने से बचाती है और बीज का अंकुरण अच्छा होता है.


